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Meri Aatmakatha

Meri Aatmakatha

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  • Pages: 416
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729586
  •  
    बहरहाल, फिल्मी दुनिया के साथ मेरा दूसरा सम्पर्क किशोर साहू के माध्यम से हुआ। उन दिनों 'हंस’ शुरू नहीं हुआ था और हम अक्षर प्रकाशन से पुस्तकें छाप रहे थे। किशोर की आत्मकथा मुझे अच्छी लगी और मैंने उसे छापने का मन भी बना लिया। किशोर की फिल्मों का मैं पुराना भक्त था। 'राजा’, 'कँुवारा बाप’, 'सावन आया रे’ इत्यादि फिल्में मैं कई-कई बार देख चुका था। सबसे अन्त में किशोर साहू को मैंने 'गाइड’ में देखा। रमोला किशोर की प्रिय हीरोइन थी। नन्ही-मुन्नी सी चंचल, चुलबुली और समर्पित लड़की। कलकत्ते में मुझे पता लगा कि इकबालपुर रोड के जिस फ्लैट में मैं रहता हँू उसके चार-पाँच मकान बाद ही रमोला भी रहती है। एक रोज उस घर का दरवाजा खटखटाने पर निकली एक काली ठिगनी बुढिय़ा से जब मैंने रमोला का नाम लिया तो उसने धड़ाक से दरवाजा बन्द कर लिया। यह मेरे लिए भयंकर मोहभंग था। क्या इसी रमोला की तस्वीर मैं अपनी डायरी में लिए फिरता था और कविताएँ लिखता था। किशोर साहू से मिलने से वर्षों पहले उनके पिता कन्हैयालाल साहू से मेरा लम्बा पत्र-व्यवहार रहा है। वे नागपुर के पास रहते थे और सिर्फ किताबें पढ़ते थे। उनके हिसाब से हिन्दी में एकमात्र आधुनिक लेखक किशोर साहू थे। मैंने भी किशोर साहू के दो-तीन कहानी-संग्रह पढ़े थे और वे सचमुच मुझे बेहद बोल्ड और आधुनिक कहानीकार लगे थे। दुर्भाग्य से हिन्दी कहानी में उनका जिक्र नहीं होता है वरना वे ऐसे उपेक्षणीय भी नहीं थे। आत्मकथा प्रकाशन के सिलसिले में किशोर साहू ने मुझे बम्बई बुलाया। स्टेशन पर मुझे लेने आए थे किशोर के पिता कन्हैयालाल साहू । मैं ठहरा कमलेश्वर के यहाँ था। शाम को किशोर के यहाँ खाने पर उस परिवार से मेरी भेंट हुई। अगले दिन किशोर मुझे अपने वर्सोवा वाले फ्लैट पर ले गए, जहाँ वे अपना पुराना बँगला छोड़कर शिफ्ट कर रहे थे। यहाँ बीयर पीते हुए हमने दिन-भर आत्मकथा के प्रकाशन पर बात की। वे इस आत्मकथा में दुनिया-भर की तस्वीरें खूबसूरत ढंग से छपाना चाहते थे। लागत देखते हुए हम लोगों की स्थिति उस ढंग से छापने की नहीं थी। उन्होंने शायद कुछ हिस्सा बँटाने की भी पेशकश की। मगर वह राशि इतनी कम थी कि आत्मकथा को अभिनन्दन-ग्रन्थ की तरह छाप सकना हम लोगों की सामथ्र्य के बाहर की बात थी। आखिर बात नहीं बनी और मुझे दिल्ली वापस आना पड़ा । वैसे किशोर में एक खास किस्म का आभिजात्य था और वह नपे-तुले ढंग से ही बातचीत या व्यवहार करते थे। —राजेन्द्र यादव

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    Kishore Sahu

    किशोर साहू
    जन्म : 22 अक्टूबर, 1915, दुर्ग, छत्तीसगढ़ में कन्हैयालाल साहू एवं प्रेमवती साहू के परिवार में।
    छत्तीसगढ़ की विभिन्न रियासतों में अपने दादा आत्माराम साहू के साथ निवास।
    प्रारम्भिक शिक्षा राजनांदगाँव में। राजनांदगाँव में पढ़ते हुए छत्तीसगढ़ की संस्कृति से गहरा लगाव, जो जीवन पर्यन्त बना रहा।
    बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री साहू हिन्दी सिनेमा में नायक, निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक के रूप में प्रसिद्ध रहे। वे कहानीकार, उपन्यासकार और चित्रकार भी थे। बाम्बे टॉकीज की फिल्म 'जीवन प्रभात' से उस जमाने की खूबसूरत नायिका
    देविका रानी के साथ नायक के रूप में फिल्मी
    जीवन की शुरुआत।
    'पुनर्मिलन', 'बहूरानी', 'सिंदूर', 'काली घटा', 'राजा',   बाप', 'हेमलेट', 'सावन आया रे', 'मयूर पंख' जैसी अपने जमाने की सुप्रसिद्ध फिल्मों में नायक के रूप में कार्य।
    'साजन','गृहस्थी', 'औरत', 'तीन बहूरानियाँ','घर बसा के देखो', 'पूनम की रात', 'हरे काँच की चूडिय़ाँ', 'पुष्पांजलि', 'दिल अपना प्रीत पराई' जैसी उत्कृष्ट हिन्दी फिल्मों का निर्देशन।
    अनेक कहानी-संग्रह और उपन्यास के लेखक।
    बैंकाक से उड़ान भरते समय हवाई अड्डे पर ही 22 अगस्त, 1980 को हृदयाघात से निधन।

    • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
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