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Magadh
Book Code: 9788126720729
Author: Shrikant Verma
Pages, Ills etc.: 111p
Year: 2011   ISBN 10: 8126720727
Binding: Hardbound   ISBN 13: 9788126720729
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
List Price: 195.00, you save 10.00%
Your Price: 176.00  

मगध - श्रीकान्त वर्मा

 

श्रीकान्त वर्मा की लम्बी काव्य-यात्रा में उनका यह कविता-संग्रह एक ऐसा मोड़ है जिसमें उनकी जिन्दगी के पेंचों-खम का असर व्याप्त है। श्रीकान्त वर्मा कभी कविता की दुनिया छोड़कर राजनीति में सक्रिय हुए थे किन्तु राजनीति से उनका मोहभंग जल्दी ही हो गया और फिर उनकी वापसी कविता की दुनिया में हुई। ‘मगध’ उनके इस परिवर्तन की परिणति है। यह सच है कि मगध की कवतिाएँ इतिहास नहीं हैं मगर इसमें इतिहास के सम्मोहन और उसके भाषालोक की अद्भुत छटा है। ध्वस्त नगर एवं गणराज्य अतीत की कहानियाँ लिए हमारी स्मृतियों में कौंध जाते हैं अपने नायक और नायिकाओं के साथ! श्रीकान्त वर्मा की लेखनी का ऐसा चमत्कार ‘मगध’ में उभरता है कि ‘मगध’, ‘अवन्ती’, ‘कोशल’, ‘काशी’, ‘श्रावस्ती’, ‘चम्पा’, ‘मिथिला’ ‘कोसाम्बी’...मानो धूल में आकार लेते हैं और धूल में ही निराकार हो जाते हैं। कहते हैं कि मनुष्य की समग्र गाथा में महाकाव्य होता है, ‘मगध’ की कविताएँ उसी समग्रता और उसी महाकाव्य को प्रस्तुत करने का एक उपक्रम हैं। ये कविताएँ काल की एक झाँकी हैं और महाकाल की स्तुति भी। ये कविताएँ अतीत का स्मरण हैं, वर्तमान से मुठभेड़ और भविष्य की झलक भी।

 

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Mohan Ka Dhukh (Children)
Book Code: 9788126720729
Author: Giriraj Kishore
Pages, Ills etc.: 16p
Year: 2011   ISBN 10: 8126720727
Binding: Paperback   ISBN 13: 9788126720729
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
List Price: 30.00, you save 10.00%
Your Price: 27.00  

मगध - श्रीकान्त वर्मा

 

श्रीकान्त वर्मा की लम्बी काव्य-यात्रा में उनका यह कविता-संग्रह एक ऐसा मोड़ है जिसमें उनकी जिन्दगी के पेंचों-खम का असर व्याप्त है। श्रीकान्त वर्मा कभी कविता की दुनिया छोड़कर राजनीति में सक्रिय हुए थे किन्तु राजनीति से उनका मोहभंग जल्दी ही हो गया और फिर उनकी वापसी कविता की दुनिया में हुई। ‘मगध’ उनके इस परिवर्तन की परिणति है। यह सच है कि मगध की कवतिाएँ इतिहास नहीं हैं मगर इसमें इतिहास के सम्मोहन और उसके भाषालोक की अद्भुत छटा है। ध्वस्त नगर एवं गणराज्य अतीत की कहानियाँ लिए हमारी स्मृतियों में कौंध जाते हैं अपने नायक और नायिकाओं के साथ! श्रीकान्त वर्मा की लेखनी का ऐसा चमत्कार ‘मगध’ में उभरता है कि ‘मगध’, ‘अवन्ती’, ‘कोशल’, ‘काशी’, ‘श्रावस्ती’, ‘चम्पा’, ‘मिथिला’ ‘कोसाम्बी’...मानो धूल में आकार लेते हैं और धूल में ही निराकार हो जाते हैं। कहते हैं कि मनुष्य की समग्र गाथा में महाकाव्य होता है, ‘मगध’ की कविताएँ उसी समग्रता और उसी महाकाव्य को प्रस्तुत करने का एक उपक्रम हैं। ये कविताएँ काल की एक झाँकी हैं और महाकाल की स्तुति भी। ये कविताएँ अतीत का स्मरण हैं, वर्तमान से मुठभेड़ और भविष्य की झलक भी।

 

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