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Aadhunikata Aur Hindi Upanyas

Aadhunikata Aur Hindi Upanyas

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  • Pages: 128p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171788644
  •  
    हिन्दी उपन्यास का इतिहास ज्यादा लम्बा नहीं है लेकिन आधुनिकता के बोध से यह पर्याप्त सम्पन्न है । आधुनिकता क्या है । यह उपन्यास के बाहर भी हो सकती है ओर साहित्य के भी । दरअसल यह एक जीवन-बोध है, जिसमें सवालों की निरन्तरता है और जिसमें स्वीकृत मूल्य अस्वीकृति के साक्ष्य तो बनते हैं परन्तु फिर स्थापित होकर विस्थापित होते जाते हैं । आधुनिकता का बोध सर्वप्रथम 'गोदान' में प्रकट होता है । यह बोध हिन्दी उपन्यासों में निजी परिवेश और निजी स्तर पर समाहित दिखलाई पड़ता है । आलोचक इन्द्रनाथ मदान के मुताबिक : ''इसका साक्षात्कार हर ऐसे उपन्यास में अपने-अपने स्तर पर हुआ है । गोदान में यह एक स्तर पर है, शेखर : एक जीवनी में दूसरे स्तर पर, बलचनमा में तीसरे स्तर पर, न आनेवाला कल में चौथे स्तर पर, एक चूहे की मौत में पाँचवें स्तर पर, सफेद मेमने में छठे स्तर पर, के दिन में सातवें स्तर पर और सुरक्षापर में आठवें स्तर पर ।' ' प्रसिद्ध आलोचक इन्द्रनाथ मदान ने इस पुस्तक में 1934-36 से 1979 तक की अवधि में आए हिन्दी उपन्यासों का मूल्यांकन आधुनिकता-बोध की कसौटी पर किया हे ।

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    Indranath Madan

    Indra Nath Madan

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