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Apni Gawahi

Apni Gawahi

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  • Pages: 195
  • Year: 2010, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614023
  •  
    कृष्णा को अमोल के दादा और गाभिन बकरी का खुशी–खुशी साथ बैठना, /ाुएँ, गोबर और कविता के बीच जीना याद आ गया । उसे अपने नाना और नानी याद आए और याद आया कि किस तरह वे भी अपना सबकुछµ अपनी जनेऊ, अपने शुद्ध–साफ कपड़े, यहाँ तक कि लाख रखवालीवाला बाग भी छोड़ते चले गए । पर उन्होंने प्रेम को, आपसी स्नेह को कभी नहीं छोड़ा । प्रेम, क्षमा और प्रेम । कृष्णा का मन हुआ कि वह अस्पताल के बिस्तर पर मुड़ी–तुड़ी लेटी इस कमजोर बूढ़ी औरत से, जो भारत सरकार द्वारा सारा प्याज मध्यपूर्व भेजने पर और सारे तेज तथा प्रतिभावान लड़कों को पश्चिम की ओर ठेलनेवाली नीति पर सख्त नाराज हो जाती थी, पूछे कि पार्वती क्या तुम्हें असली प्रेम का मतलब मालूम है । अगर मालूम है तो मुझे भी कुछ बताओ । यह बताओ कि जब इस नई दुनिया में तुम्हारा बेटा और उत्तरा/िाकारी सात समुन्दर पार से सेटेलाइट फोन से डॉक्टरों से एक विदेशी भाषा में बात कर रहा है तब एक बेटी प्रेम की तुम्हारी इस वसीयत को अपनी मातृभाषा में कैसे सँभाले ? ऐसे प्रेम को तुम क्या कहोगी जो सपनों से वास्तविकता को, मनुष्यों से भाषा को और अन्त से शुरू को जुदा ही नहीं करना चाहता ?

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    Mrinal Pandey

    जन्म: 26 फरवरी, 1946 को टीकमगढ़, मध्य प्रदेश में।

    शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य), प्रयाग विश्वविद्यालय, इलाहाबाद। गन्धर्व महाविद्यालय से ‘संगीत विशारद’ तथा कॉरकोरन स्कूल ऑफ आर्ट, वाशिंगटन में चित्रकला एवं डिजाइन का विधिवत् अध्ययन।

    कई वर्ष विभिन्न विश्वविद्यालयों (प्रयाग, दिल्ली, भोपाल) में अध्यापन के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आईं। साप्ताहिक हिन्दुस्तान व वामा की सम्पादक तथा दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी सम्पादक रहीं। स्टार न्यूज और दूरदर्शन के लिए हिन्दी समाचार बुलेटिन का सम्पादन किया। दैनिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी एवं नन्दन की प्रमुख सम्पादक रहीं।

    प्रकाशित पुस्तकें: विरुद्ध, पटरंगपुर पुराण, देवी, हमका दियो परदेस, अपनी गवाही (उपन्यास); दरम्यान, शब्दवेधी, एक नीच टेªजिडी, एक स्त्री का विदागीत, यानी कि एक बात थी, बचुली चौकीदारिन की कढ़ी, चार दिन की जवानी तेरी (कहानी-संग्रह); मौजूदा हालात को देखते हुए, जो राम रचि राखा, आदमी जो मछुआरा नहीं था, चोर निकल के भागा, सम्पूर्ण नाटक (नाटक) और देवकीनन्दन खत्री के उपन्यास काजर की कोठरी का इसी नाम से नाट्य-रूपान्तरण, परिधि पर स्त्री, स्त्री: देह की राजनीति से देश की राजनीति तक, स्त्री: लम्बा सफर (निबन्ध); बन्द गलियों के विरुद्ध (सम्पादन), ओ उब्बीरी (स्वास्थ्य)।

    अंग्रेज़ी: द सब्जेक्ट इज वूमन (महिला-विषयक लेखों का संकलन), द डॉटर्स डॉटर, माई ओन विटनेस (उपन्यास), देवी (उपन्यास-रिपोर्ताज), स्टेपिंग आउट: लाइफ एंड सेक्सुअलिटी इन रूरल इंडिया।

    सम्प्रति: अध्यक्ष, प्रसार भारती।

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