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Astittva Ki Khoj : Bhartiya Itihas Ki Mahattvapurn Striyan

Astittva Ki Khoj : Bhartiya Itihas Ki Mahattvapurn Striyan

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  • Pages: 320
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388183277
  •  
    स्त्रिायों के योगदान का जश्न मनानेवाले पुरुष विमर्श में आमतौर पर यह कहने का चलन रहा है कि स्त्रिायाँ कोमल लताओं-सी हैं जो अपनी नाज़ुक पत्तियाँ किसी ऐसे विशाल वृक्ष के तने के गिर्द लपेटती ऊपर चढ़ती हैं, जो उनके जीवन का पुरुष हो, चाहे वह पुरुष पिता हो, पति हो या फिर मार्गदर्शक। पर हमने पाया कि इस बिम्ब के ठीक उलट, कुछ स्त्रिायाँ स्वतंत्रा रूप से ‘वृक्षों’ में विकसित हुईं। इस पुस्तक की सभी स्त्रियाँ यहाँ इसीलिए मौजूद हैं। इन स्त्रिायों ने कुछ ऐसा रचा-गढ़ा जो उनके बाद भी जि़न्दा है, फिर चाहे वह रचना कोई संस्था हो, कला विधा या उसका रचना-संकलन हो, या कोई ढाँचा, कोई दर्शन, कोई तकनीक या कोई सामाजिक आन्दोलन हो। अपने जीवन के एकान्त स्थलों को छोड़ व्यापक दुनिया से जुड़ने की चेष्टा में उन्होंने तमाम विरोधों व निषेधों का सामना किया। गायिकाओं और सक्रिय कर्मियों ने मूक कर देने की धमकियों के बावजूद, नतीजों की परवाह किए बिना बेधड़क अपनी बात कही। राजनीतिज्ञों और अभिनेत्रियों ने घर के बाहर मुँह उघाड़ने पर निन्दा झेली, पर फिर भी जुटी रहीं। उनकी कथाओं का संकलन कर हम एक परम्परा रच रहे हैं, रिवायतें स्थापित कर रहे हैं जिनसे आज की नारियाँ प्रेरणा ले सकती हैं और अपना जीवन सुधार सकती हैं। समृद्ध वैविध्य के ताने-बानों से बुनी उनकी इन कथाओं को एक ही वृहत् पाठ के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। -भूमिका से

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    Rekha Modi

    रेखा मोदी : स्त्री-इतिहास विशेषज्ञ, सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता, कलाओं की पारखी एवं लेखिका। कार्यक्षेत्र सार्क देशों तक विस्तृत है। इनका विश्वास है कि स्त्रियों की पूर्ण भागीदारी एवं उनकी सक्रिय भूमिका समाज को सशक्त करती है।

    श्रीमती मोदी का जन्म 1955 में मोदी नगर के औद्योगिक परिवार में हुआ। उनकी शिक्षा श्रमिकों  के बच्चों के साथ मोदी नगर में, और आदिवासियों के बच्चों के साथ ग्वालियर में हिन्दी माध्यम से हुई थी। ज़मीन से जुड़ी होने के कारण अपनी माता श्रीमती दयावती मोदी से प्रेरित होकर उन्होंने 1984 में 'दिव्य छाया ट्रस्ट’ की स्थापना की। यह संस्था निम्न आय वर्ग की कम्यूनिटी के साथ काम कर रही है। इनकी दूसरी संस्था 'स्त्री शक्ति : द पैरलल फ़ोर्स’—1998, स्त्री सशक्तिकरण को लेकर सक्रिय है जो आधुनिक युग की स्त्रियों को स्त्री के इतिहास को जानने के लिए प्रेरित करती है। इस सन्दर्भ में विदुषी विद्योत्तमा को भी प्रकाश में लाया जाएगा, जोकि सि$र्फ कालिदास की प्रेरणा ही नही थीं बल्कि अभिन्न रचयिता थीं।

    डॉ. कमल किशोर मिश्र : सहायक प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता। कार्यक्षेत्र : सांस्कृतिक राजनयिक के रूप में संस्कृत की ऐतिहासिक परम्परा, प्राचीन अभिलेख, पुरालिपि, पाण्डुलिपि, भारतीय डायस्पोरा और सांस्कृतिक मनोविज्ञान है। अनेक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित डॉ. मिश्र, स्त्री शक्ति : द पैरलल $फोर्स, कलकत्ता के मानद सदस्य भी हैं। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ :  'नटराज ब्रह्मांड का दिव्य नर्तन’, 'महाभारत में आत्म-तत्त्व : भारतीय आख्यान परम्परा के सन्दर्भ में’, 'प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्था’, 'कला, स्थापत्य और शिल्प : श्रीरघुनाथ मन्दिर, जम्मू’ तथा 'भारत-फिजी : स्मृतियाँ’। सन् 2009 से 2013 तक सांस्कृतिक राजनयिक के रूप में, पूर्व निदेशक, भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र, भारत का उच्चायोग, फिजी से सम्बद्ध। इसके माध्यम से भारत की शिक्षा और सांस्कृतिक सामथ्र्य को चार वर्षों तक निरन्तर विस्तार दिया है । 

    प्रो. रिमी बी. चटर्जी : अंग्रेज़ी विभाग, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता। उपन्यासकार एवं लेखिका ।

    पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा : अनुवाद का दीर्घ अनुभव।

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