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Baharhaal, Dhanyavaad

Baharhaal, Dhanyavaad

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  • Pages: 160
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126730506
  •  
    अचला बंसल अंग्रेज़ी में लिखनेवाली भारतीय कथाकार हैं जिन्हें अंग्रेज़ीभाषी पाठकों में उनकी सा$फगोई और गहरी अन्तर्दृष्टि के लिए जाना जाता है। उन्होंने अक्सर अपनी कहानियों में भारतीय समाज और मन के उन कोनों की पड़ताल की है जहाँ कई बार भारतीय भाषाओं के लेखक भी जाने से चूक जाते हैं। वे उन गिने-चुने अंग्रेज़ी लेखकों में हैं जिन्हें पढऩे से पता चलता है कि भारतीय अंग्रेज़ी लेखन अपनी दुनिया को सि$र्फ विदेशी निगाह से नहीं देखता। अचला बंसल ने अपनी कहानियों में न सिर्फ उन विडम्बनाओं को बहुत स्पष्ट निगाह से देखा है जिनसे हमारा मध्य और निम्न-मध्य वर्ग गुज़रता है, बल्कि उच्च मध्यवर्गीय समाज की तहों में भी वे बहुत विश्वसनीय ढंग से उतरती हैं। इसके साथ ही अपने पात्रों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल भी उनकी कहानियों की एक विशेषता है जिसका बहुत अच्छा उदाहरण इस संग्रह में शामिल कहानी ‘तुरुप का पत्ता’ है। इस कहानी में पुरुष समलैंगिकता में पौरुष की भूमिका को स्त्री के विरुद्ध जाते हुए बहुत महीन ढंग से दिखाया गया है। इस परिस्थिति में जटिल होते रिश्तों में स्त्री की असहायता को शायद ही कभी इतने मार्मिक ढंग से उठाया गया हो। संग्रह में शामिल सभी कहानियाँ हिन्दी के पाठकों के लिए एक भिन्न भावभूमि पर एक भिन्न पाठ-अनुभव उपलब्ध कराती हैं जो न सि$र्फ अपनी विषयवस्तु में नया है बल्कि ट्रीटमेंट में भी। बेशक सभी कहानियाँ अनूदित हैं लेकिन जानी-मानी कथाकार और अचला जी की बहन मृदुला गर्ग तथा हमारे समय के बहुत संवेदनशील रचनाकार प्रियदर्शन व स्मिता द्वारा किए गए इन अनुवादों में कहीं भी भाषा के स्तर पर अपरिचय जैसा महसूस नहीं होता।

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    Achala Bansal

    अचला बंसल, अंग्रेज़ी की सम्मानित लेखिका हैं। उनकी कहानियाँ देश-विदेश की पत्रिकाओं में ससम्मान छपती रही हैं। अंग्रेज़ी में उनके चार कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘वन्स ए इयर इट्स मार्च’, ‘ऐस अपोन किंग’, ‘चैकमेट’ और 2016 में प्रकाशित ‘आई कॉन्टेक्ट’। ‘चैकमेट’ अचला बंसल की लीक से हटी पाँच कहानियों के संग्रह का नाम है, जो स्के्रव प्रेस, यू.के. से 2009 में प्रकाशित हुआ। उसमें प्रकाशित कहानी ‘चैकमेट’ को 2007 में यू.के. का ‘ए बुक फॉर बोर्गेस’ पुरस्कार प्राप्त हुआ। अचला बंसल की कथा-शैली में सहजता, मौलिकता और बतरस का अद्भुत समन्वय देखा जा सकता है। हिन्दी में अनूदित उनकी कई कहानियाँ 2009-10 में ‘आउटलुक’, ‘जनसत्ता’, ‘पाखी’, ‘हंस’ आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। कुछ कहानियाँ तेलुगू आदि अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनूदित हैं। 2014 में अन्य दो लेखिका बहनों के साथ उनकी कहानी ‘कैरम की गोटियाँ’ ‘बिसात : तीन बहनें तीन आख्यान’ नामक पुस्तक में संकलित हुई है और विशेष रूप से चर्चित-प्रशंसित रही है। मनीष त्रिपाठी के शब्दों में, ‘‘इनके लेखन में ऐसी विविधता है जैसे रोशनी की एक लकीर प्रिज़्म से गुज़रकर सात रंगों में बदल जाती है।’’

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