• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Bezubaan

Bezubaan

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 125

Special Price Rs. 112

10%

  • Pages: 143p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171195717
  •  
    बेजुबान सुभाष शर्मा ने नवें दशक में युवा कथाकार के रूप में अपनी स्पष्ट पहचान बना ली है। जीवन के विभिन्न आयामों को काफी गहराई से देखने एवं समझने का माद्दा उनमें है। वे सामाजिक घटनाओं को ऐसी दृष्टि से देखते हैं जो समाज को आगे ले जाने वाली होती है। उनकी सोच-समझ कभी भी बने-बनाए साँचे में फिट नहीं होती क्योंकि वह जीवनानुभव से संबद्ध है। उनकी कहानी ‘बेजुबान’ नवें दशक की एक महत्त्वपूर्ण कहानी है। इसकी चर्चा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में होती रही है। समकालीन हिंदी कहानी से गुजरते हुए यह बात निर्विवाद रूप से कही जा सकती है कि सामाजिक अनुभवों का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है, तथा मानवीय दृष्टिबोध और अधिक गहरा। अपने आसपास बिखरे जीवन-यथार्थ को अनदेखा कर आज का कथाकार किसी अगम्य फलसफे को रचने में विश्वास नहीं रखता। कहना न होगा कि सुपरिचित कवि-कहानीकार सुभाष शर्मा के इस संग्रह की कहानियों को इसी श्रेणी में रखा जाएगा। इस संग्रह में सुभाष शर्मा की दस कहानियाँ संगृहीत हैं और इनमें से प्रायः प्रत्येक कहानी भारतीय जन-जीवन की किसी-न-किसी विडंबना को उजागर करती है। आजादी के बाद हमारे चारों ओर जिस सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षिक तंत्र का निर्माण हुआ है, मनुष्य उसमें सब कहीं शिकार की तरह छटपटा रहा है। इस तंत्र में मौजूद जल्लादों के अनेक चेहरे ‘जल्लाद’ नामक व्यक्ति से कहीं अधिक भयावह हैं। ‘हिंदुस्तनवा’, ‘फरिश्ते’, ‘ज़मीन’, ‘आँचल’ और ‘जल्लाद’ जैसी कहानियाँ अपनी गंभीर अर्थवत्ता से हमें बहुत गहरे तक झकझोरती हैं, और यदि ‘फरिश्ते’ के सहारे कहा जाए तो हर प्रकार की अमानवीय दुर्गंध के बावजूद मानवीय संबंधों की महक का भी बखूबी अहसास कराती हैं।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Subhash Sharma

    जन्म: 20 अगस्त 1959, सुल्तानपुर (उ.प्र.) में।

    शिक्षा: एम.ए. एम.फिल्. (समाजशास्त्र) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से। एम.ए. (विकास प्रशासन एवं प्रबंधन) मैनचेस्टर विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) से। पर्यावरण पर किया गया शोध-कार्य चर्चित।

    प्रकाशित कृतियाँ: अंगारे पर बैठा आदमी (कविता-संग्रह), ज़िंदगी का गद्य (कविता-संग्रह), दुष्चक्र (कहानी-संग्रह), मवेशीबाड़ा (जार्ज आर्वेल के उपन्यास का अनुवाद), कायान्तरण तथा अन्य कहानियाँ (काफ्का की कहानियों का अनुवाद), अँधेरा वहाँ भी है (विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ), एग्रेरियन रिलेशन्स (अंग्रेजी में), भारत में बाल मजदूर, मीठी बोली (बाल-कथाएँ), भारतीय महिलाएँ: दशा एवं दिशा

    पुरस्कार: बिहार सरकार से विशिष्ट हिन्दी-सेवी सम्मान (1995), इंटैक (भारत) द्वारा पर्यावरण पर किया गया शोध-कार्य पुरस्कृत (1999)

    सम्प्रति: ‘सम्भव’ का सम्पादन

    सम्पर्क: 22/60, ऑफिसर्स फ्लैट, बेली रोड,

    पटना-800001

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144