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Bhakti Ke Teen Swar : Miraan, Sur, Kabir

Bhakti Ke Teen Swar : Miraan, Sur, Kabir

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Regular Price: Rs. 250

Special Price Rs. 225

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  • Pages: 303
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388933100
  •  
    अतीत से सीखना जरूर चाहिए, लेकिन सीखा तभी जा सकता है जब हम अतीत के अतीतपन का सम्मान करें। वर्तमान के राजनीतिक या सामाजिक द्वंद्वों को अतीत पर आरोपित करने से वर्तमान और अतीत दोनों की समझ धूमिल होती है। इस पुस्तक के आरम्भ में ही हौली इसे ‘ऐतिहासिक तर्क और विवेक के प्रति अपील’ कहते हैं, इन कवियों की रचनाशीलता और इनके समय के साथ कल्पनापूर्ण, आलोचनात्मक संवाद के महत्त्व पर बल देते हैं। ऐसे संवाद के बिना भक्ति-संवेदना का संवेदनशील अध्ययन असम्भव है। हौली इस पुस्तक में इन तीन कवियों से जुड़े विशिष्ट सवालों—समय, रचनाओं की प्रामाणिकता, संवेदना का स्वभाव, लोक-स्मृति में उनका स्थान—आदि पर तो विचार करते ही हैं, वे इनके बहाने भक्ति-संवेदना से जुड़े व्यापक प्रश्नों पर भी विचार करते हैं। पाठ-निर्धारण ऐसा ही प्रश्न है। इसी तरह का सवाल है निर्गुण-सगुण विभाजन का। —पुरुषोत्तम अग्रवाल सम्पादक, भक्ति-मीमांसा शृंखला

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    John Stratton Hawley

    जॉन स्ट्रैटन हौली

    जॉन स्ट्रैटन हौली--जैक--के नाम से भी जाने जाते हैं | भारत की भक्ति परंपरा पर आपकी चर्चित किताबें हैं - अ स्ट्रोर्म ऑफ़ सांग्स : इंडिया एंड दि आइडिया ऑफ़ दि भक्ति मूवमेंट (होर्वार्ड, 2015), सूर 'स ओशन (कैनेथ ब्रायंट के साथ, होर्वार्ड,2015), इन टू सूर 'स ओशन (होर्वार्ड ओरिएंटल सीरीज, 2016), सूरदास : पोएट, सिंगर, सैंट (प्राइमस, 2018) | आप गुग्गेनहेम और फुलब्राइट-नेहरु फेलो रह चुके हैं और अमेरिकन अकेडमी ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंस के लिए भी मनोनीत हो चुके हैं |

    फ़िलहाल कोलम्बिया यूनिवर्सिटी के बर्नार्ड कॉलेज के धर्म विभाग में प्रोफेसर हैं |

    अनुवादक - अशोक कुमार

    बिहार में 1974 के जन-आन्दोलन की पत्रिका 'तरुण क्रांति' और 'समग्रता' में पत्रकारिता का प्रारंभिक पाठ पढने के बाद दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता का डिप्लोमा | 'धर्मयुग' (पत्रिका), 'जनसत्ता' (दैनिक), 'इंडिया टुडे हिंदी' (पत्रिका), 'इंडिया टुडे साहित्य वार्षिकी' और 'शुक्रवार' के सम्पादक मंडल में विभिन्न पदों पर काम करने के बाद सम्प्रति गांधी शांति प्रतिष्ठान से जुड़ाव | आपके अनुवाद में ज्याँ द्रेज और अमर्त्य सेन की कृति 'भारत और उसके विरोधाभास' राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित है |

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