• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Bharat Mein Bandhua Mazdoor

Bharat Mein Bandhua Mazdoor

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 300

Special Price Rs. 270

10%

  • Pages: 157p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171194834
  •  
    देश की जिन गंभीर समस्याओं पर मुख्यधारा का मीडिया खामोश रहता है और सरकार उदासीन, उनमें बंधुआ मजदूरों की समस्या भी एक है । सरकारी घोषणाओं में यह समस्या खत्म हो चुकी है और मीडिया के लिए इसमें सनसनी नहीं रही । लेकिन समस्या अभी जहाँ की तहाँ है । 1975 में राष्ट्रपति के एक अध्यादेश के जरिए औपचारिक तौर पर बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन देश के लगभग सभी राज्यों में आज भी यह प्रथा बिना किसी रोक-टोक के जारी है । बीच-बीच में सरकारें बंधुआ तौर पर काम कर रहे मजदूरों की मुक्ति और पुनर्वास का स्वांग भी रचती हैं, लेकिन मुक्त कराए गए मजदूरों को पुन: एक नए तरह की बंधुआ मजदूरी का शिकार होना पड़ा है । न तो उनकी जीविका के लिए पर्याप्त साधन मुहैया कराए गए और न ही शक्तिशाली भूमिपतियों से उनकी हिफाजत का कोई विश्वसनीय इंतजाम हो पाया । 'भारत में बंधुआ मजदूर' इस समस्या का सर्वांग अध्ययन प्रस्तुत करती है । प्रख्यात बंगला लेखिका महाश्वेता देवी यहाँ पूर्णतया एक शोधकर्मी के तौर पर प्रकट हुई हैं, जाहिर है, उत्पीड़ितों-उपेक्षितों के लिए अपनी सर्वज्ञात संवेदना के साथ । शोधकर्म की निर्मम असंलग्नता से बचते हुए, विषय के साथ नितांत मानवीय लगाव के साथ यह शोध किया गया है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Mahashweta Devi

     महाश्वेता देवी

    जन्म : 1926, ढाका।

    पिता श्री मनीष घटक सुप्रसिद्ध लेखक थे।

    शिक्षा : प्रारम्भिक पढ़ाई शान्तिनिकेतन में, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.।

    अर्से तक अंग्रेजी का अध्यापन।

    कृतियाँ अनेक भाषाओं में अनूदित।

    हिन्दी में अनूदित कृतियाँ : चोट्टि मुण्डा और उसका तीर, जंगल के दावेदार, अग्निगर्भ, अक्लांत कौरव, 1084वें की माँ, श्री श्रीगणेश महिमा, टेरोडैक्टिल, दौलति, ग्राम बांग्ला, शालगिरह की पुकार पर, भूख, झाँसी की रानी, आंधारमानिक, उन्तीसवीं धारा का आरोपी, मातृछवि, सच-झूठ, अमृत संचय, जली थी अग्निशिखा, भटकाव, नीलछवि, कवि वन्द्यघटी गाईं का जीवन और मृत्यु, बनिया-बहू, नटी (उपन्यास); पचास कहानियाँ, कृष्णद्वादशी, घहराती घटाएँ, ईंट के ऊपर ईंट, मूर्ति, (कहानी-संग्रह); भारत में बँधुआ मजदूर (विमर्श)।

    सम्मान : जंगल के दावेदारपुस्तक पर साहित्य अकादेमी पुरस्कारमैगसेसे अवार्डतथा ज्ञानपीठ  पुरस्कारद्वारा सम्मानित।

    निधन : 28-07-2016 (कोलकाता)।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144