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Bihar Ke Mere Pachchis Varsh

Bihar Ke Mere Pachchis Varsh

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  • Pages: 126p
  • Year: 2018, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8183610625
  • ISBN 13: 9788183610629
  •  
    जिस काल खंड में देश का पढा-लिखा वर्ग बिहार जाने से डर रहा था और बिहार का पढ़ा-लिखा वर्ग, राज्य से बाहर नहीं तो, गाँवों को छोड़ शहरों में अपनी जगह बनाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहा था उस वक्त कल्पना महाराष्ट्र के सुव्यवस्थित माहौल को छोड़कर स्वेच्छा से बिहार आई और वहाँ किसी शहर में नहीं हैं बल्कि धुर गाँवों में काम कर रही हैं । बिहार में काम करने के माध्यम के रूप में इन्होंने एक सस्था बनाई और गाँव की मुसहर तथा दुसाध दलित महिलाओं के बीच काम शुरू किया । गांधीवादी विचार को माननेवाले समूहों के साथ चर्चा करने के लिए एक सगठन द्वारा इन्हें जर्मनी बुलाया गया । एक प्रसिद्ध शान्तिवादी संगठन आई एफ.ओ.आर. के स्वीडन सम्मेलन में शामिल हुई और फिलाडेल्फिया के क्वेकर समूह द्वारा आयोजित लम्बे प्रशिक्षण कोर्स का भी अनुभव लिया । इन अनुभवों के सरथ-साथ बिहार के गाँवों को भी देखना, समझना और वह भी अन्दर घुसकर सामाजिक कायों के माध्यम रो-खुद लेखिका के लिए भी वहुत शिक्षाप्रद और रोमांचक रहा है । इस किताब में उन्होंने बिहार के गाँवों के झरोखों से जैसा देखा, वैसा लिखा है । अपने काम का जिक्र करते हुए वहाँ के समाज की आवश्यकताएँ बताईं हैं, लोगों के स्वभाव बतलाए हैं और सम्बन्धों के पारिवारिक व सामाजिक ताने-बाने को खोलकर दिखाया है । आशा है, विषय की गहराई में जाने वाले लोगों को यह किताब अच्छी लगेगी ।

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    Kalpana Shastri

    कल्पना शास्त्री महाराष्ट्र की हैं । मराठी भाषी हैं । फिर भी हिन्दी मराठी दोनों भाषाओं पर इनका समान प्रभुत्व है ।
    समाज की व्यवस्था के बारे में इनका गहन अध्ययन रहा है । वे समाज सेवा से 17 वर्ष क्री उम से ही जुड़ गई थीं जब वे बांग्लादेशी शरणार्थियों के लिए काम करने वर्धा महाराष्ट्र से गई थीं । कॉलेज जीवन पूरा होने पर इन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में सामाजिक काम भी किया । 25 बर्ष की उम में बिहार के निवासी प्रसिद्ध गांधीवादी कुमार शुभमूर्ति से शादी की और उनके घर रोसडा को कार्यक्षेत्र बनाकर दलितों के बीच काम करना शुरू किया । इनका उनका मुख्य केन्द्र औरतें और बच्चे रहा है ।
    डॉ. कल्पना शास्त्री ने कई अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित भी किए हैं और दुनिया- भर में समाज के बदलाव के लिए जो लोग काम कर रहे हैं, उनके आमंत्रण पर कई जगह मीटिंग और सेमिनार में ये निमंत्रित हुई हैं । आयफोर और ट्रेनिंग फॉर चेंज,
    जैसे पीस गुप्त से ये जुडी रही हैं । वक्तृत्व प्रभावी होने के कारण इन्हें कई जगह देश-विदेश बुलाया भी गया । बहाँ इनके भाषण हुए ।
    इनकी दो बेटियाँ हैं । दोनों उच्च शिक्षित हैं । दोनों को इन्होंने स्कूल नहीं भेजा । आज के शोषणकारी शिक्षण तंत्र के विरोध में ये खड़े रहे । स्कूली सिस्टम के दबावों और कमियों को हटाने के लिए शिक्षा के दूसरे तरीके अपनाए ।
     उन्होंने कईं किताबें लिखी हैं जिनमें है 'जर्मनी : यह कैसा विकास', 'हम औरतों के लिए', 'मिथिला की हरिजन औरत' प्रमुख हैं । सभी किताबों का मराठी व इंग्लिश में अनुवाद भी हो चुका है ।

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