• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Chanda Ka Gond Rajya

Chanda Ka Gond Rajya

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 200

Special Price Rs. 180

10%

  • Pages: 121p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126715763
  •  
    भारत के हृदय में स्थित विंध्याचल और सतपुड़ा की उपत्यकाएँ सघन वनों और पर्वत श्रेणियों के कारण प्राचीनकाल से ही दुर्गम रही हैं और भारत के इतिहास में इस क्षेत्र का उपयुक्त ऐतिहासिक विवरण मुश्किल सेे मिलता है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण इस पर उत्तर और दक्षिण की राजनीति का कम ही प्रभाव पड़ा। प्र्राचीनकाल मेें यहाँ मौर्यों, सातवाहनों, वाकाटकांे, राष्ट्रकूटों, यादवों का आधिपत्य रहा। एक लम्बे अन्तराल के बाद खलजी और तुगलकों ने यादव सत्ता की चूलें हिला दीं। इसके बाद इस क्षेत्र में करीब दो सदियों तक कोई प्रबल सत्ता नहीं रही। दो सदियों के इस अंधकार युग के बाद चाँदा राज्य का उदय हुआ। इस कृति में चाँदा राज्य के उत्थान और पतन का वर्णन करने हेतु नवीनतम सामग्री का उपयोग किया गया है। इस सामग्री में समकालीन और लगभग समकालीन फारसी अखबारात और मराठी पत्रों का स्थान महत्त्वपूर्ण है। इस कृति की विशेषता यह भी है कि चाँदा के गोंड राज्य की वंशावली तथा जल-आपूर्ति व्यवस्था पर इसमें विशेष चर्चा की गयी है, जो विभिन्न दृष्टिकोणों से इन विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास करती है। चूँकि मूल फारसी, मराठी स्रोतों में तथा सनदों में इसे चाँदा राज्य कहा गया है, अतः इस कृति में इसे चाँदा राज्य ही कहा गया है। चाँदा का गोंड राज्य भारत के हृदय में स्थित विंध्याचल और सतपुड़ा की उपत्यकाएँ सघन वनों और पर्वत श्रेणियों के कारण प्राचीनकाल से ही दुर्गम रही हैं और भारत के इतिहास में इस क्षेत्र का उपयुक्त ऐतिहासिक विवरण मुश्किल सेे मिलता है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण इस पर उत्तर और दक्षिण की राजनीति का कम ही प्रभाव पड़ा। प्र्राचीनकाल मेें यहाँ मौर्यों, सातवाहनों, वाकाटकांे, राष्ट्रकूटों, यादवों का आधिपत्य रहा। एक लम्बे अन्तराल के बाद खलजी और तुगलकों ने यादव सत्ता की चूलें हिला दीं। इसके बाद इस क्षेत्र में करीब दो सदियों तक कोई प्रबल सत्ता नहीं रही। दो सदियों के इस अंधकार युग के बाद चाँदा राज्य का उदय हुआ। इस कृति में चाँदा राज्य के उत्थान और पतन का वर्णन करने हेतु नवीनतम सामग्री का उपयोग किया गया है। इस सामग्री में समकालीन और लगभग समकालीन फारसी अखबारात और मराठी पत्रों का स्थान महत्त्वपूर्ण है। इस कृति की विशेषता यह भी है कि चाँदा के गोंड राज्य की वंशावली तथा जल-आपूर्ति व्यवस्था पर इसमें विशेष चर्चा की गयी है, जो विभिन्न दृष्टिकोणों से इन विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास करती है। चूँकि मूल फारसी, मराठी स्रोतों में तथा सनदों में इसे चाँदा राज्य कहा गया है, अतः इस कृति में इसे चाँदा राज्य ही कहा गया है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Suresh Mishra

    जन्म: 9 नवम्बर, 1937 - महाराजपुर, मण्डला (म.प्र.)।

    शिक्षा: एम.ए. इतिहास 1960, पी-एच.डी. 1973।

    1960-98 तक म.प्र. के शासकीय महाविद्यालयों में अध्यापन।

    प्रकाशित पुस्तकें: अकबर, गढ़ा के गोंड राज्य का उत्थान और पतन, पश्चिमोत्तर सीमान्त नीति (1839-1947), रानी दुर्गावती, मध्य प्रदेश के गोंड राज्य, भारत का इतिहास (1740-1857), 1857 - मण्डला के दस्तावेज, 1857 - रामगढ़ की रानी अवन्तीबाई, 1857 - मध्य प्रदेश के रणबांकुरे (दूसरा संस्करण), 1842 के विद्रोही हीरापुर के हिरदेशाह, इतिहास के पन्नों से, काफिले यादों के, ट्राइबल्स असेंडेंसी इन सेंट्रल इंडिया - द गोंड किंगडम ऑफ गढ़।

    सम्पादित पुस्तकें: मालवा और निमाड़ का इतिहास और संस्कृति, मालवा और बुन्देलखंड, साहित्य में इतिहास, मध्ययुगीन मध्य प्रदेश, संधान 1, 2, 3, 4, और 5।

    अनुवादित पुस्तकें: भारतीय संस्कृति पर इस्लाम का प्रभाव, खलजी वंश का इतिहास, लोक प्रशासन, भारतीय कृष्णमृग, मिथ्स ऑफ मिडिल इंडिया।

    हिन्दी संक्षिप्तीकरण: आधी दुनिया भूखी क्यों (दूसरा संस्करण); बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर सरकारें मेहरबान, दुनिया की भुखमरी: 12 गलतफहमियाँ।

    सम्पर्क: 13 वर्द्धमान परिसर, चूनाभट्टी, कोलार रोड, भोपाल।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144