• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Charitraheen

Charitraheen

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 299

Special Price Rs. 269

10%

  • Pages: 408p
  • Year: 2019, 3rd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183614238
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    नारी का शोषण, समर्पण और भाव-जगत तथा पुरुष समाज में उसका चारित्रिक मूल्यांकन - इससे उभरने वाला अन्तर्विरोध ही इस उपन्यास का केन्द्रबिन्दु है। शरतचन्द्र ने नारी मन के साथ-साथ इस उपन्यास में मानव मन की सूक्ष्म प्रवृत्तियों का भी मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है, साथ ही यह उपन्यास नारी की परम्परावादी छवि को तोड़ने का भी सफल प्रयास करता है। उपन्यास सवाल उठाता है कि देवी की तरह पूजनीय और दासी की तरह पितृसत्ता के अधीन घुट-घुटकर जीने वाली स्त्री के साथ यह अन्तर्विरोध और विडम्बना क्यों है? उपन्यास ‘चरित्र’ की अवधारणा को भी पुनःपरिभाषित करता है। चरित्र को स्त्री के साथ ही अनिवार्य गुण की तरह क्यों जोड़ा जाता है? वह कैसे चरित्रहीन हो जाती है? उसे चरित्रहीन कहने वाला कौन होता है? यह प्रसिद्ध उपन्यास बार-बार हमें इन सवालों के सामने ला खड़ा करता है। नारी भावनाओं को अभिव्यक्त करने में दक्ष शरत् बाबू इस उपन्यास में उस परिवर्तन को भी रेखांकित करते हैं जो समाज में आया है इसलिए दशकों पहले लिखा गया यह उपन्यास आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उल्लेखनीय है कि इस उपन्यास का अनुवाद नए सिरे से किया गया है, उन तमाम अंशों को साथ रखते हुए जो अभी तक उपलब्ध अनुवादों में छोड़ दिए गए थे। एक सम्पूर्ण उत्कृष्ट उपन्यास।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Sharatchandra

    शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

    जन्म: 15 सितम्बर, 1876 को हुगली जिले के देवानंदपुर (पश्चिम बंगाल) में हुआ।

    प्रमुख कृतियाँ: पंडित मोशाय, बैकुंठेर बिल, मेज दीदी, दर्पचूर्ण, श्रीकान्त, अरक्षणीया, निष्कृति, मामलार फल, गृहदाह, शेष प्रश्न, देवदास, बाम्हन की लड़की, विप्रदास, देना पावना, पथेर दाबी और चरित्रहीन।

    ‘चरित्रहीन’ पर आधारित 1974 में फिल्म बनी थी। ‘देवदास’ फिल्म का निर्माण तीन बार हो चुका है। इसके अतिरिक्त ‘परिणीता’ 1953 और 2005 में, ‘बड़ी दीदी’ (1969) तथा ‘मँझली बहन’ आदि पर भी चलचित्रों के निर्माण हुए हैं। ‘श्रीकान्त’ पर टी.वी. सीरियल भी बन चुका है।

    निधन: 16 जनवरी, 1938

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144