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Charkhe Per Badhat Aur Anya Nibandh

Charkhe Per Badhat Aur Anya Nibandh

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  • Pages: 175p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171787614
  •  
    उदयन वाजपेयी के ये निबन्ध हिन्दी में निबन्ध के 'अनाख्यानकाल' के प्रारम्भ का नान्दी-पाठ हैं । यह शब्द मदन सोनी का है जिसका इस्तेमाल उदयन ने 'समय की छवियाँ' शीर्षक निबन्ध में भी किया है किन्तु मदन सोनी और उदयन के प्रयोगों से मुअत्तर इस शब्द से मैं वह भी झलकाना चाहता हूँ जो 'आदि-काल, 'गीतिकाल', 'साठोत्तरी कविता', 'कविता की वापसी' जैसी घोषणाओं में, हिन्दी आलोचना का एक प्रिय कर्तव्य रहा है । इन निबन्धों में साहित्य और कला के अतिरिक्त जीवन की बहुत-सी बातें हैं, श्रीकान्त वर्मा, स्वामीनाथन और मिलान कुन्देरा के साथ-साथ रसोईघर और पाठ्‌य-पुस्तक भी हैं । इन्हें 'साहित्यिक', 'विचारात्मक', 'समीक्षात्मक' आदि की कोटियों में बाँटने की कोशिश करते समय मुझे जौ शीर्षक सूझने लगे, वे अ इस प्रकार के थे-'रसोईघर में मिलान कुचेरा, 'श्रीकान्त वर्मा की अलिखी किताब के अक्षर', 'स्वामीनाथन के चरखे पर एक बढ़त' आदि । मैं सिर्फ यही कह सकता हूँ कि महात्मा गाँधी की बात हो या फणीश्वर नाथ 'रेणु' की, आप किसी भी रसोईघर में और किसी भी किताब में जाते-आते यह देख लें कि उदयन के ये निबन्ध इधर से गुजरे हैं कि नहीं तो अच्छा ही रहेगा । क्योंकि इनमें अर्थ का एक 'बेगानापन' है । -वागीश शुक्ल

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    Udayan Vajpayee

    उदयन वाजपेयी

    जन्म : ४ जनवरी, १९६०, सागर, मध्यप्रदेश।

    प्रकाशित पुस्तकें :

    कुछ वाक्य, पागल गणितज्ञ की कविताएँ (कविता-संग्रह); सुदेशना, दूर देश की गन्ध, सातवाँ बटन (कहानी-संग्रह); चरखे पर बढ़त, जनगढ़ कलम, पतझर के पाँव की मेंहदी (निबन्ध और यात्रा वृत्तान्त) ; अभेद आकाश ( फिल्मकार मणि कौल से बातचीत); मति, स्मृति और प्रज्ञा ( इतिहासकार धर्मपाल से बातचीत); का.ना. पणिक्कर पर थियेटर ऑफ रस और रतन थियाम पर थियेटर ऑफ ग्रेंजर ; वी आँविजि़ब्ल (फ्राँसीसी में कविताओं के अनुवाद की पुस्तक); मटमैली स्मृति में प्रशान्त समुद्र (जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा के हिन्दी में अनुवाद); कविताओं, कहानियों और निबन्धों के अनुवाद तमिल, बाङ्ला, ओड़िया, मलयालम, मराठी, अँग्रेज़ी, फ्राँसीसी, स्वीडिश, पोलिश, इतालवी, बुल्गारियन आदि भाषाओं में।

    कुमार शहानी की फिल्म 'चार अध्याय' और 'विरह भर्यो घर-आँगन कोने में' का लेखन।

    कावालम नारायण पणिक्कर की रंगमण्डली 'सोपानम्' के लिए उत्तररामचरितम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम् की हिन्दी में पुनर्रचना, पणिक्कर के साथ कालिदास के तीनों नाटकों के आधार पर संगमणियम् नाटक का लेखन।

    २००० में लेविनी (स्वीट्ज़रलैण्ड) में और २००२ से पेरिस (फ्राँस) में 'राइटर इन रेसिडेंस', २०११ में नान्त (फ्राँस) में अध्येता की तरह आमन्त्रित। 

    मई २००३ में फ्राँस के राष्ट्रीय पुस्तकालय में भारतीय कवि की हैसियत से व्याख्यान। वाराणसी, भुबनेश्वर, पटना, मुम्बई, दिल्ली, पेरिस, मॉस्को, जिनिवा, काठमाण्डू आदि स्थानों पर कला, साहित्य, सिनेमा, लोकतन्त्र आदि विषयों पर व्याख्यान। 

    रज़ा फाउण्डेशन और कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार से सम्मानित।

    गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अध्यापन।

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