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Chuppi Ki Guha Mein Shankh Ki Tarah (Raza Pustak Mala)

Chuppi Ki Guha Mein Shankh Ki Tarah (Raza Pustak Mala)

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  • Pages: 118
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388753210
  •  
    चन्द्रकान्त देवताले की सर्जनात्मकता बहुआयामी और विविधवर्णी है। उसे पढ़ते हुए, उस पर किसी एकरैखिक सार की तरह सोचना, सम्भव ही नहीं हो पाता। खासकर तब, जब पाठक उसे अपने आस्वाद और अनुभव की उत्कट निजता में पढ़ रहा हो। वह सुझाने, रिझाने या समझाने-बुझाने वाली कविता से भिन्न, अन्तरात्मिक और ऐन्द्रिक अनुभूति की एक ऐसी कविता है, जो अपनी लयात्मक विविधता से, सामान्य शब्दों, रोज़मर्रा की घटनाओं, स्थिरबुद्धि, सीमित विचारों और आधुनिक तथा प्राचीन काव्य संस्कारों का कायाकल्प करती सी लगती है। उसे पढऩे के दौरान, मैं यह लगातार महसूस करता रहा हूँ, कि ठण्डी वस्तुपरकता के साथ, उस पर विचार करना मेरे लिए कभी सम्भव नहीं हो पाता है। इस अर्थ में, इन निबन्धों को आत्मपरक निबन्ध ही कहा जा सकता है। ये निबन्ध, एक ऐसे कवि के रचना-संसार से जुड़े हैं, जो असम्भव आत्मविस्तार के निरन्तर प्रयत्नों का कवि है। इस लिए इन निबन्धों में भी, आस्वादक आत्म की दुनिया से कहीं, बहुत बड़ी और गतिमान दुनिया गतिशील है। चन्द्रकान्त देवताले स्वभाव-कवि है। कविता उसके अस्तित्व का अविभाज्य हिस्सा है। उसकी कविता के संस्कार और उसके जीवन के संस्कार भी, हिन्दी की देशज कविता और लोकजीवन के संस्कार हैं। यही नहीं, उसकी कविता में प्राय: सर्वत्र सक्रिय प्रकृति भी, उसकी सर्जनात्मकता के देशज संस्कारों को ही जीवित करती है। उसकी कविता के रचाव में आदिमता और देशज आधुनिकता की अनुगूँजें ही नहीं, बल्कि मानवीय और पारिवारिक रिश्तों की एक गझिन दुनिया है। चन्द्रकान्त देवताले पर लिखे गये इन निबन्धों में मैंने इस बात की कोशिश की है कि अपने आस्वाद के अनुभवों को इस तरह लिख सकूँ, कि उनकी रचना के मुक्त विन्यास को, पाठक अपनी तरह से पढऩे का खुला अवकाश पा सकें। —प्रस्तावना से ''आलोचना सच्चा-गहरा साहचर्य भी होती है। हिन्दी कवि चन्द्रकान्त देवताले और कवि-आलोचक प्रभात त्रिपाठी सि$र्फ कविता में सहचर नहीं थे, मुक्तिबोध को लेकर सहचर-पाठक नहीं थे, वे कई बरस भौतिक रूप से साथ रहे थे। यह पुस्तक उस साहचर्य का किंचित् विलम्बित प्रतिफल है। हमें विश्वास है कि चन्द्रकान्त देवताले की कविता को समझने में इसकी निर्णायक भूमिका होने जा रही है। रज़ा पुस्तक माला में इसे प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है।’’ —अशोक वाजपेयी

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    Prabhat Tripathi

    प्रभात त्रिपाठी

    जन्म : 14 सितम्बर, 1941, रायगढ़ (छ.ग.)।

    शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी., सागर विश्वविद्यालय (म.प्र.)।

    1994-95 में म.प्र. साहित्य अकादमी के सचिव, 2002-03 में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी वि.वि. में अतिथि लेखक।

    प्रकाशन : खिड़की से बरसात (अशोक वाजपेयी द्वारा सम्पादित 'पहचान' सीरिज), नहीं लिख सका मैं, आवाज, जग से ओझल, सड़क पर चुपचाप, लिखा मुझे वृक्षों ने, साकार समय में, बेतरतीब (कविता); सपना शुरू, अनात्मकथा (उपन्यास); प्रतिबद्धता और मुक्तिबोध का काव्य, रचना के साथ, पुनश्च  (आलोचना); तलघर और अन्य कहानियाँ (कहानी); कुछ सच कुछ सपने, तुमुल कोलाहल कलह में (अन्य गद्य)।

    ओड़िया से अनुवाद : समुद्र : सीताकान्त महापात्र, सीताकान्त महापात्र की प्रतिनिधि कविताएँ, गोपीनाथ महांती की कहानियाँ, अपार्थिव प्रेम कविता : हरप्रसाद दास, वंश : महाभारत कविता : हरप्रसाद दास, शैल कल्प : राजेन्द्र किशोर पंडा।

    सम्पादन : पूर्वग्रह के प्रारम्भिक अंकों के सम्पादन में विशेष सहयोग, 1994-95 में म.प्र. साहित्य अकादमी की पत्रिका साक्षात्कार का सम्पादन, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के लिए भवानीप्रसाद मिश्र की रचनाओं के संकलन का सम्पादन, चन्द्रकान्त देवताले की कविताओं का सम्पादन।

    पुरस्कार : वागीश्वरी पुरस्कार, माखनलाल चतुर्वेदी सम्मान, सौहार्द्र पुरस्कार, शमशेर सम्मान, मुक्तिबोध सम्मान, कृष्ण बलदेव वैद सम्मान आदि। 

    सम्पर्क : रामगुड़ी पारा, रायगढ़-496001

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