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Computer V Soochana Prodyogiki Shabdkosh

Computer V Soochana Prodyogiki Shabdkosh

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  • Pages: 316p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183615075
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि अंग्रेजी अब एक अन्तर्राष्ट्रीय भाषा बन चुकी है। फ्रेंच, स्पेनिश आदि भाषाएँ जो कभी अंग्रेजी का मुकाबला किया करती थीं अब कोसों पीछे रह गई हैं। इसी तरह सम्पूर्ण भारत में हिन्दी अब एक मात्र सम्पर्क भाषा है और वह वास्तव में राष्ट्रभाषा का रूप ले चुकी है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार आज भारत में अंग्रेजी (टूटी-फूटी ही सही) जानने-समझने व बोलने वालों की संख्या मात्र बारह करोड़ है जबकि हिन्दी जानने-समझने, बोलने वालों की संख्या 55-56 करोड़ से अधिक है। अन्य भाषा-भाषियों की शिक्षा के लिए जो त्रिभाषा फार्मूला अपनाया गया था वह भी रंग लाया है। आज लगभग 18 करोड़ लोग तीन भाषाएँ जैसे - बांग्ला, मराठी, उर्दू आदि बोलते समझते हैं। कम्प्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी आज प्रमुख व आधार विषय हैं। इनका अध्ययन व प्रयोग अच्छी नौकरी या व्यवसाय की गारंटी है। आज भारतीय सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों ने पूरे विश्व में झंडा गाड़ रखा है। अन्य विषयों के अध्ययन व प्रयोग में भी कम्प्यूटरों व सूचना प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग होता है। हालाँकि भारत के बड़े क्षेत्र में बिजली का भारी अभाव है पर फिर भी कम्प्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी की पहुँच दूर दूर तक बढ़ रही है। इससे कार्य पद्धति वैज्ञानिक हो रही है और पारदर्शिता भी आ रही है। ‘कम्प्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी शब्दकोश’ इस दिशा में एक विनम्र प्रयास है। इसका मूल उद्देश्य है अपनी भाषा में शिक्षा ग्रहण करने वालों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु एक बफर के रूप में कार्य करना। इस शब्दकोश के माध्यम से कम्प्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रयुक्त शब्दों व शब्दावलियों के बारे में पर्याप्त समझ विकसित हो जाएगी जिससे वे आगे की शिक्षा अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा के माध्यम से ग्रहण कर पाएँगे।

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    Vinod Kumar Mishra

    जन्म: 12 जनवरी, 1960, इटावा (उ.प्र.)।

    शिक्षा: विकलांग होने के बावजूद हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। सन् 1983 में रुड़की विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की उपाधि प्राप्त कर सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सी.ई.एल.) में सहायक अभियंता के रूप में नियुक्त हुए। विभिन्न विभागों में काम करते हुए आजकल वरिष्ठ तकनीकी प्रबंधक के रूप में काम कर रहे हैं।

    अब तक कुल 30 पुस्तकें (17 विकलांगता सम्बन्धी तथा 11 विज्ञान सम्बन्धी) प्रकाशित। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लगभग 300 लेख प्रकाशित।

    पुरस्कार सम्मान: सन् 1996 में राष्ट्रपति पदक, 2001 में ‘हिंदी अकादमी सम्मान’ तथा योजना आयोग द्वारा ‘कौटिल्य पुरस्कार’। सन् 2003 में अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय द्वारा ‘प्राकृतिक ऊर्जा पुरस्कार’, 2004 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा ‘सृजनात्मक लेखन पुरस्कार’, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ‘डा. मेघनाद साहा पुरस्कार’ तथा महासागर विकास मंत्रालय द्वारा ‘हिंदी लेखन पुरस्कार’।

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