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Dard Jo Saha Maine

Dard Jo Saha Maine

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  • Pages: 276p
  • Year: 2013, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126725045
  •  
    'दर्द जो सहा मैंने...' आशा आपराद की आत्मकथा है ! 'एक भारतीय मुस्लिम परिवार' में जन्मी ऐसी स्त्री की गाथा जिसने बचपन से स्वयं को संघर्षो के बीच पाया ! संघर्षो से जुजते हुए किस प्रकार आशा ने शिक्षा प्राप्त की, परिवार का पालन-पोषण किया, अपने घर का सपना साकार किया-यह सब इस पुस्तक के शब्द-शब्द में व्यंजित है ! अपनी माँ से लेखिका को जो कष्ट मिले, उनका विवरण पढ़कर किसी का भी मन विचलित हो सकता है ! लेकिन पिता का स्नेह इस तपते रेतीले सफ़र में मरूद्यान की भांति रहा ! इस आत्मकथा में आशा आपराद ने जीवन की गहराई में जाकर और भी अनेक रिश्ते-नातों का वर्णन किया है ! सुख-दुःख, मिलन-बिछोह और आभाव-उपलब्धि के धागों से बुनी एक अविस्मरणीय आत्मकथा हे 'दर्द जो सहा मैंने...' 'मनोगत' में आशा आपराद ने लिखा है : मेरी किताब सिर्फ 'मेरी' नहीं, यह तो प्रतिनिधिक स्वरुप की है, ऐसा मैं मानती हूँ ! हमारा देश तो स्वतंत्र हुआ लेकिन यहाँ का इंसान 'गुलामी' में जी रहा है ! अगर यह सच न होता तो आज भी औरतों को, पिछड़े वर्ग को, गरीब वर्ग को अधिकार और न्याय के लिए बरसों तक झगड़ना पड़ता क्या ! आज भी स्त्रियों पर अनंत अत्याचार होते हैं ! दहेज़ के लिए आज भी कितनों को जलना पड़ता है ! बेटी पैदा होने से पहले ही उसे गर्भ में 'मरने का' तंत्र विकसित हो गया है ! मैं चाहती हूँ, जो स्त्री-पुरुष गुलामी का दर्द, अन्याय सह रहे हैं, शोषित हैं, अत्याचार में झुलस रहे हैं, उन सबको अत्याचार के विरोध में लड़ने की, मुकाबला करने की शक्ति प्राप्त हो, बल प्राप्त हो ! निश्चित रूप से यह आत्मकथा प्रत्येक पाठक को प्रेरणा प्रदान करेगी ! मराठी से हिंदी में अनुवाद स्वयं आशा आपराद ने किया है ! जो अपने मराठी आस्वाद के चलते एक अदभुत प्रदान करता है !

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    Aasha Aaprad

    जन्म: 14 अप्रैल, 1952, कोल्हापुर (महाराष्ट्र)।

    शिक्षा: एम.ए., बी.एड., एम.फिल.।

    व्यवसाय: 1984 से यशवंतराव चव्हाण कॉलेज में हिन्दी विषय की अध्यापिका।

    सामाजिक कार्यक्षेत्र: 1984 से महिला दक्षता समिति (कोरगावकर ट्रस्ट) की उपाध्यक्षा।

    मुस्लिम तथा अन्य महिलाओं के जन-जागरण हेतु कानूनी जानकारी, साक्षरता का महत्त्व, अन्धश्रद्धा निर्मूलन, मासाबालसंगोपन आदि विषयों पर संगोष्ठी, व्याख्यान व शिविर का आयोजन।

    ‘मुस्लिम महिला सानक मुक्ति मोर्चा’ तथा शहाबानो आन्दोलन में सक्रिय सहभाग।

    कोल्हापुर में आयोजित मुस्लिम मराठी साहित्य सम्मेलन में ‘इसनममध्ये स्त्री चे स्थान’ विषय पर आलेख वाचन।

    सम्मान/पुरस्कार: उदयोन्मुख आदर्श शिक्षिका: ताराराणी अध्यानक महाविद्यालय, उर्मिलकाकी सबनीस सामाजिक पुरस्कार: मा. प्रमिला दंडवते द्वारा सम्मानित। ‘भोगले जे दुख त्याल’ मराठी आत्मचरित्र के लिए प्राप्त पुरस्कार: महाराष्ट्र साहित्य परिषद, पुणे: लक्ष्मीबाई टिळक स्मृति प्रीत्यर्थ पुरस्कार; भैरूरसन दमाणी साहित्य पुरस्कार; महाराष्ट्र शासन उत्कृष्ट मराठी वाङ्मय राज्य पुरस्कार; साहित्य प्रेम भगिनी मंडळ, पुणे द्वारा सुधासाई जोशी जी.ए. पुरस्कार; व्हिक्टर पैलेस पुरस्कार; क्रांतिवीर तांबटकाका पुरस्कार, कोल्हापुर; ओबीसी मुस्लिम आर्गनायजेसण पुरस्कार, कोहिनूर पुरस्कार; कै. काकासाहेब गाडगील पुरस्कार, पितृ पुरस्कार; महाराष्ट्र कामगार कल्याण मंडळ, कोल्हापुर पुरस्कार; शिवसेना महिला बचत गट विशेष समारोह में पुरस्कार; डॉ. काशिबाई नवरंगे गौरव पुरस्कार; साहित्य सम्राट न.चि. केळकर ग्रन्थालय मुसुंड द्वारा साहित्य साधना पुरस्कार।

    सम्पर्क: ‘आशा’, कदमवाडी रोड, महादेव मन्दिर के सामने, कोल्हापुर-416003

     

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