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Das Hazar Crore Se Aage

Das Hazar Crore Se Aage

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  • Pages: 170p
  • Year: 2005
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171199127
  •  
    दस हजार से आगे गिरिराज हिमालय के मध्य भाग में स्थित उत्तरांचल सर्वाधिक शान्त पर्वतीय प्रदेश है। गंगोत्री, यमुनोत्री के आँचल में सजे इस प्रदेश में हिमाच्छादित पर्वत-शिखरों की वरद छाया, पंच-परमेश्वर तथा सप्त प्रयाग से सुसज्जित निर्मल जल-प्रवाह एवं नैसर्गिक हरीतिमा से आच्छादित विस्तृत वन्य प्रदेश है। आध्यात्मिक पर्यटन के लिए सुप्रसिद्ध उत्तरांचल में देश-विदेश से पर्यटकों के आने की परम्परा शताब्दियों से स्थापित है। उल्लेखनीय है कि इस प्रदेश ने नए उद्योगों की स्थापना हेतु अपनी नई औद्योगिक नीति तथा उदार क्रियान्वयन प्रक्रिया से देश-विदेश के उद्यमी-जगत में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। ‘दस हजार करोड़ से आगे’ में नव उद्योग-स्थापना एवं पूँजी-निवेश के लिए कृत-संकल्प सचिव, संजीव चोपड़ा के निजी संस्मरण संकलित हैं। डायरी के रूप में लिखे गए यह प्रसंग केवल दैनन्दिन विवरण नहीं, अपितु रोचक विजय-गाथा हैं। विशेष रियायती पैकेज के साथ पूँजी-निवेश को आकर्षित करने वाला मूल तत्त्व है: उत्तरांचल का उदार आतिथ्य एवं प्रक्रियात्मक पारदर्शिता। उद्योग विभाग ने उत्तरांचल को उद्यमियों के लिए पूँजी- निवेश हेतु ‘शिखर राज्य’ के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नए उद्योगों की स्थापना से उत्तरांचल आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर है तथा स्थानीय निवासियों को रोजगार के अवसर देने की ओर उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। ‘दस हजार करोड़ से आगे’ में लेखक ने प्रशासनिक कुशलता के साथ मानवीय संवेदना का अद्भुत विवरण प्रस्तुत किया है। निश्चित रूप से, ‘दस हजार करोड़ से आगे’ पाठकों के लिए प्रेरणा है, निवेशकर्त्ताओं के लिए आमंत्रण है, भावी प्रशासकों के लिए निर्देशिका है।

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    Sanjeev Chopra

    संजीव चोपड़ा उत्तरांचल सरकार में उद्योग विभाग के सचिव पद पर आसीन हैं। इससे पूर्व, वह लाल बहादुरशास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अबादमी, मसूरी में सहकारिता एवं ग्राम्य विकास केन्द्र में प्रबंध विभाग में संयोजक एवं प्रवक्त रहे। उनके पूर्वदायित्वों में प्रमुख हैं: मुरादाबाद में जिलाधिकारी एवं हिमालयन दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (पश्चिम बंगाल) में मुख्य प्रबंधक का कार्य-भार। 1985 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में सम्मिलित होने से पूर्व, उन्होंने ‘द टाइम्स ऑफ इण्डिया’ और ‘द इक्नॉमिक टाइम्स’ में कार्य किया।

    1998 एवं 1999 में उन्हें क्रमशः मैक्नमारा तथा ह्यूबर्ट एच. हम्फ्री फैलोशिप प्रदान की गई।

    उन्हें स्वाध्याय एवं लेखन का शौक है तथा सूर्योदय से पहले वन अनुसंधान संस्थान में प्रातः भ्रमण उनके लिए आत्मचिन्तन का सुखद समय है। जीवन के प्रत्येक क्षण में सार्थकता ढँूढ़ लेना उनका विशिष्ट गुण है। चुनौती को मुस्कुराते हुए अवसर में बदलने की उनकी अपनी कला अद्वितीय है।

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