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Dasham Rasa

Dasham Rasa

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  • Pages: 79p
  • Year: 1999
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171194737
  •  
    दशम् रस ‘टाई कलर’ शीर्षक कहानी और ‘हर दिन’ शीर्ष्ज्ञक कविता, जिनका प्रकाशन क्रमशः 1957 ई. में ‘कहानी’ में तथा 1963 ई. में ‘माध्यम’ में हुआ, के रचनाकार सच्चिदानन्द सिन्हा के प्रथम काव्य-संग्रह ‘आठवाँ दिन’ (1997 ई.) के बाद दूसरा काव्य-संग्रह ‘दशम् रस’ है। कवि श्री सिन्हा की आस्था है: ‘‘कविता ने कवि को भले ही तरह-तरह से नष्ट होने की छूट दी, परंतु जीवन को नहीं, कविता के संकल्प को नहीं...कवि तो एक-न-एक दिन मरेगा ही, परंतु कविता एक दिन के लिए भी नहीं मरे - यही कवि और कविता की आंतरिक लय है। कविता बच गई, कविता ने जीवन को बचा लिया: यही कवि की अनुभूतिश्री है, अभिव्यक्तिश्री है।’’’ इस परिप्रेक्ष्य में कवि के लिए सड़क का एक चौराहा, स्कूल से लौटते हुए बच्चे, लाल टिब्बा के उ$पर चांॅद, मौन का उंॅ$ट, गेहंॅू की बालियांॅ कहीं-न-कहीं किसी-न-किसी अवतरण से एक पारस्परिकता से अनुप्राणित एवं अनुस्वरित हैं और इसी बोध-प्रबोधन-संबोधन में एक जमीन तैयार होती है जिससे जीवन के ‘विविधता-विधीक्षित’ अनुक्षणों की अर्थच्छाओं की ही एक चरम परिणति होती है, ‘‘अभिव्यक्ति की एक कल्पना का दशम् रस!’’ फ्रांसीसी कवि चार्ल्स बादलेअर के काव्य-संग्रह ‘ले फ्ला द्यु मॉल’ की भांॅति ‘दशम् रस’ में एक आंतरिक अन्विति है जो ‘प्रबंध काव्य की प्रबंध-काव्यात्मकता से साक्षात्कार कराती है। शायद यह लेखन, विचार, भाषा और समझ की वह नई सच्चाई है जो जो गत तीन दशकों के कवियों ने भोगा है।’ आशा की जानी चाहिए कि ‘दशम् रस’ इस आनंद और विश्वास को पुष्ट करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी होगा कि ‘कवि के सृजनात्मक रूपांतरण में जीया हुआ जीवन अधिक गहरा, सच्चा और सम्प्रेष्य हो जाता है, सृष्टा के रचे जीवन की तरह।’

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    Sachchidanand Sinha

    सच्चिदानंद सिन्हा

    सच्चिदानंद सिन्हा का जन्म 30 अगस्त,1928 को मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज के परसौनी ग्राम में हुआ। आपका नाम देश के वरिष्ठ समाजवादी विचारकों में शुमार है। अपने छात्र जीवन में ही समाजवादी मूल्यों की राजनीति की तरफ आकृष्ट हुए। फिर, सोशलिस्ट पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। डॉ. लोहिया की पत्रिका ‘मैनकाइंड’ के सम्पादक मंडल में भी रहे और बाद के दिनों में अपने मित्र किशन पटनायक की वैचारिक पत्रिका ‘सामयिक वार्ता’ के सम्पादकीय सलाहकार रहे। आपने अंग्रेजी तथा हिन्दी में दर्जनों पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें महत्त्वपूर्ण हैं : ‘सोशलिज्म एंड पावर’, ‘कियोस एंड क्रिएशन’, ‘कास्ट सिस्टम : मिथ रियलिटी एंड चैलेंज’, ‘कोएलिशन इन पॉलिटिक्स’, ‘इमर्जेन्सी इन परस्पेक्टिव’, ‘इंटरनल कॉलोनी’, ‘दी बिटर हार्वेस्ट’, ‘सोशलिज्म : ए मैनिफेस्तो फॉर सरवाइवल’, ‘समाजवाद के बढ़ते चरण’, ‘वर्तमान विकास की सीमाएँ’, ‘पूंजीवाद का पतझड़’, ‘संस्कृति विमर्श’, ‘मानव सभ्यता और राष्ट्र-राज्य’, ‘संस्कृति और समाजवाद’, ‘पूँजी का चौथा अध्याय’, ‘भारतीय राष्ट्रीयता और साम्प्रदायिकता’ इत्यादि।

    निवास स्थान : ग्राम व पोस्ट—मनिका, जिला— मुजफ्फरपुर (बिहार), पिन-845431।

    रामजय प्रताप पेशे से वकील हैं। साथ ही, एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। कला-संस्कृति, साहित्य व राजनीतिक विचार विषयक प्रकाशनों में इनकी गहरी अभिरुचि है और ऐसी चीजों का अनुवाद वह समय-समय पर करते रहते हैं। सच्चिदानंद सिन्हा की पाँच पुस्तकों का इन्होंने हिन्दी अनुवाद किया है और यह पुस्तक उन्हीं महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में से एक है।

    स्थायी पता : ग्राम व पोस्ट—चैता, जिला—पूर्वी चंपारण (बिहार), पिन-845414।

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