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Dehati Duniya

Dehati Duniya

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  • Pages: 182p
  • Year: 2019, 6th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126702596
  •  
    फणीश्वरनाथ रेणु ने अपने उपन्यास मैला आँचल (1953) की भूमिका में पहली बार आंचलिकता की धारणा का विशेष उल्लेख किया था, किन्तु कथा-साहित्य में आंचलिकता की स्थापना पहली बार देहाती दुनिया (1926) के लेखन-प्रकाशन के साथ हुई, यह सर्वमान्य है। हालाँकि यह उपन्यास आज से लगभग सात दशक पूर्व लिखा गया था किन्तु इसमें वर्णित गाँव की यथातथ्य संस्कृति एवं सभ्यता की झाँकी आज भी उतनी ही सटीक है, जितनी पहले थी। ठेठ देहाती शैली इस उपन्यास की विशिष्टता है, जो गाँव की फटेहाली और विकृतियों यथा जादू-टोना, अन्धविश्वास आदि का चित्राण करती हैं। देहाती दुनिया गाँव के भोले-भाले लोगों पर पुलिसिया जुल्मो-सितम की भी कहानी कहती है। इस उपन्यास में सबसे रोचक और मनभावन प्रसंग है बचपन की चुहुलबाजी का। इसमें एक ओर अपने इकलौते लाडले के लिए माँ के निश्छल प्रेम की झाँकी है तो दूसरी ओर अपने बेटे के भविष्य को लेकर पिता की चिन्ता भी व्यक्त हुई है।

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    Shivpujan Sahai

    आचार्य शिवपूजन सहाय

    जन्म : 9 अगस्त, 1893, उनवाँस नामक गाँव (शाहाबाद) |

    प्रारंभिक शिक्षा देहाती पाठशाला में | इंट्रेंस के पहले तक उर्दू-फारसी के विद्यार्थी थे | इंट्रेंस के समय उर्दू-फारसी छोड़कर हिंदी का अध्ययन शुरू किया | पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कॉलेज की शिक्षा से वंचित | 1913 में ही, बनारस की अदालती-कचहरी में हिंदी नक़लनवीस की नौकरी की | 1914 में विभिन्न संस्थाओं में हिंदी शिक्षक रहे | साथ ही स्थानीय सेवा-समिति के संयुक्त मंत्री तथा तथा नागरी-प्रचारिणी सभा के सहकारी मंत्री भी रहे | 1923 में 'मर्वाला' मंडल की स्थापना हुई और वे उसमे चले आए | 1939 से 1949 तक राजेंद्र कॉलेज, छपरा में प्राध्यापक रहे | 1960 में 'पद्मभूषण' की उपाधि से अलकृत | 1962 में भागलपुर विश्विद्यालय से डी.लिट्. की मानद उपाधि |

    प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : देहाती दुनिया (उपन्यास); हिंदी ट्रांसलेशन, बिहार का विहार, विभूति (कहानी-संग्रह); वे दिन वे लोग, बिम्ब : प्रतिबिम्ब (संस्मरण) ; शिवपूजन रचनावली (4 खंड) |

    संपादन : मारवाड़ी सुधार (1921); आदर्श (1922); मौजी, समन्वय, गोलमाल, माधुरी, उपन्यास-तरंग (1925); बालक (1926); गंगा (1933); हिमालय (1945-46); राजेंद्र अभिनन्दन ग्रन्थ (1947); साहित्य (1950) |

    निधन : 21 जनवरी, 1963

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