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Dunia Jaisi Maine Dekhi

Dunia Jaisi Maine Dekhi

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  • Pages: 136
  • Year: 2015
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616911
  •  
    डॉ. जगदीश अग्रवाल प्रवासी भारतीय संघ से जुड़े हैं ! विदेशों में रह रहे भारतीय के भीतर भी यहाँ के तीज-त्यौहार, यहाँ के संस्कार, यहाँ के रीति-रिवाज, यहाँ का मौसम, पेड़-पौधे, पक्षी जीवित रहते हैं ! विदेशों में हसने के बाद भी रिश्तों की नफासत, रिश्तों के प्रति प्रतिबद्धताएँ बदल नहीं पातीं ! कह सकते हैं कि प्रवासी भारतीय विदेशी सरजमीं पर भारतीयता को जीवित रखने की कला को विकसित करते हैं ! कभी यह भारतीयता कविता के रूप में सामने आती है तो कभी कहानी और उपन्यासों के रूप में ! डॉ. जगदीश अग्रवाल का यह कविता संग्रह एक प्रवासी भारतीय की ऐसी ही भावनाओं को समर्पित है ! इसका प्रकाशन एक तरह से प्रवासी भारतियों को जोड़ने का भी प्रयास है-ऐसे भारतियों को, जो किसी न किसी रूप में साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े हैं !

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    Jagdish Prasad Agarwal

    इलाहबाद में 10 जुलाई, 1934 को मेरा जन्म हुआ, श्रीनाथ एवं श्रीमती कमला अग्रवाल के यहाँ। बचपन से मेरी भीतर गणित और हिन्दी साहित्य के प्रति लगाव पैदा हुआ। अग्रवाल विद्यालय इंटर कॉलेज में शिक्षक के रूप में कवि हरिवंश राय बच्चन का सान्निध्य प्राप्त हुआ। अकादमिक रूप से भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र और गणित मेरे प्रिय विषय रहे। लेकिन इलाहबाद विश्वविद्याल में दाखिला लेने के बाद बच्चन, रामकुमार वर्मा, फिराक गोरखपुरी, धीरेन्द्र वर्मा और राम प्रसाद त्रिपाठी जैसी प्रसिद्ध बौद्धिक प्रतिभाओं ने मेरे भीतर सोये कवि को जगा दिया। कई अर्थों में यहीं से मेरी साहित्यिक यात्रा शुरू हुई। 1952 में बी-एस.सी. और 54 में एम-एस.सी. की परीक्षा उत्तीर्ण। 1966 में हल विश्वविद्यालय से सॉलिड स्टट फिजिक्स में पी-एच.डी. की उपाधि हासिल की। लन्दन पहुँचने के बाद मेरे भीतर का कवि और ज्याद जीवन्त हो गया। कविताओं ने मेरे लिए पूरक का काम किया। जीवन में भौतिक रूप से मैंने वह सब हासिल किया जिसके सपने कोई भी युवा देखता है, लेकिन मेरी आन्तरिक और मानसिक आवश्यकताओं को पूरा किया इन कविताओं ने। यह सम्भव है कि आपको इन कविताओं मेें कवित्व बहुत ज्यादा न मिले, लेकिन इतना निश्चित है कि इन कविताओं में आपको एक ऐसे व्यक्ति का जीवन दर्शन दिखाई पड़ेगा, जो सब कुछ हासिल करने के बाद भी अपने भीतर के कवि को जीवित रखना चाहता है। आप इन्हें पसन्द करें या ना करें, लेकिन इन्हें अनदेखा नहीं कर पाएँगे, इसी उम्मीद से यह कविताएँ आपको सौंप रहा हूँ।

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