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Ek Akshar Bhi Jhootha Nahin

Ek Akshar Bhi Jhootha Nahin

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  • Pages: 133p
  • Year: 2003
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 8126706767
  •  
    एक नन्ही बच्ची - अपने ख्वाबों की दुनिया में अपनी ख्वाहिशें लेकर बड़ी होना चाहती है, जैसे हर शिशु चाहता है। परन्तु सामाजिक, पारिवारिक अनुशासन और परिवेश के दबाव, अपने ख्वाबों और ख्वाहिशों के अनुसार बड़ी होने के मार्ग में बाधक बनते हैं और परिणामस्वरूप मन में जिद पनपती है। अन्य दो-चार लड़कियों की भाँति सपनों, तर्कों, समाज, परिवार, परिवेश की आहुति दे वह बड़ी हो सकती थी, लेकिन वह सिर्फ लड़की नहीं, इन्सान है, इसलिए तर्कों और विवेक के साथ अपनी इच्छानुसार बड़ी होना चाहती थी। इसीलिए, समाज, परिवार और अनुशासन को अँगूठा दिखा एक ‘विधर्मी’, अफ़गान युवक से शादी रचा सपनों के रथ पर सवार हो रवीन्द्रनाथ के काबुलीवाले के देश में कदम रखा। अफ़गानिस्तान की धरती पर कदम रखते ही उसके सारे सपने चूर-चूर हो गए। यह तो रवीन्द्रनाथ के रहमत का देश नहीं है ! यह तो मानो मध्ययुगीन, अशिक्षाग्रस्त, जर्जर, दासप्रथावाला अन्धकारमय असांस्कृतिक देश है ! विवेक और मानवता उसे जेहाद छेड़ने के लिए प्रेरित करते। आखिर शिक्षा, नारी-स्वाधीनता के नाम पर, मानवता के पक्ष में अपना सिर उठाकर उसने मनुष्यता के शत्रु ‘इस्लामी’ गुरु और उनके शिष्य तालिबानियों के विरुद्ध संग्राम छेड़ ही दिया। तालिबानों के अत्याचारों, दम-घोंटू रीति-रिवाजों, पल-पल मौत के साए में जीवन बसर करनेवाले मजलूमों, बेकसूरों के खौफ की सच्ची दास्तान है सुष्मिता वंद्योपाध्याय का यह तीसरा आत्मकथात्मक उपन्यास - एक अक्षर भी झूठा नहीं !

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    Sushmita Bandyopadhyay

    जन्म: खुलना जिला के एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में, 1956 में।

    शिक्षा: सेंट जोसेफ कॉन्वेंट में।

    ससुराल: अफगानिस्तान में।

    पिता: भूतपूर्व सैनिक।

    प्रिय कवि: जीवनानन्द दास।

    प्रिय लेखक: आशुतोष मुखोपाध्याय, कालकूट, समरेश मजूमदार और जॉन रीड।

    प्रिय शायर: नजरुल इस्लाम।

    पसंदीदा पर्यटन स्थल: जंगल और समुद्र।

    ‘काबुलीवाले की बंगाली बीबी’ (उपन्यास) का हिन्दी में भरपूर स्वागत हुआ।

    रुचिवान इनसान अच्छे लगते हैं। जाति या धर्म को नहीं मानतीं। स्वाधीन विचारों की यह लेखिका अपने दिन का ज्यादा हिस्सा पुस्तकें पढ़ने और लिखने में व्यतीत करती हैं।

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