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  • Pages: 96p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180312069
  •  
    किसी निकटस्थ की गोद ऐसी भावनात्मक, मन को रोमांचित और अन्तस के तारों को छू लेने और कुरेर देने वाली गोद होती है, जिसकी तुलना नहीं हो सकती ! गोद ममतामयी माँ की हो, स्नेहसिक्त पिता की हो, हर संकट के समय प्रश्रय देने वाले बड़े भाई की हो या स्नेहमयी भाभी की गोद में ममता और सांत्वना की अद्दितीय क्षमता होती है ! गोद का यह महत्व अद्दितीय है, अतुलनीय है ! व्यक्ति कितना भी भटकाव में हो, अपराध कर बैठा हो, किन्तु पश्चाताप की भावना ससे जब अपने वरिष्ठ निकटस्थ की गोद में सर रख देता है और उसके सर पर स्नेहपूर्ण हाथ की सह्लावत की अनुभूति होती है तो दोनों की आँखों के भावना-मिश्रित आंसुओं की धाराएँ पवित्र संगम की धारा की तरह प्रवाहित हो जाती हैं ! सियारामशरण गुप्त जी के इस उपन्यास का कथानक अनेक उतार-चढाव तथा पात्रों के तरह-तरह के कृत्यों के साथ आगे बढ़ता हुआ अंट में कुछ ऐसे मुकाम पर पहुँच जाता है कि वातावरण मन को अन्दर तक छू लेने वाला बन जाता है ! यह अत्यन्त रोचक उपन्यास जीवन की उच्च भावनात्मक मनःस्थिति को ऐसे प्रभावी रूप में उद्देलित कर देता है कि पाठक का मन भी अन्दर तक उद्देलित हो उठे !

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    Siyaramsharan Gupt


    श्री सियारामशरण गुप्त
    जन्म : 1895, चिरगाँव, झांसी, उत्तर प्रदेश देहावसान : 29 मार्च, 1963
    श्री सियारामशरण गुप्त राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई थे । कवि, कथाकार और निबन्ध लेखक के रूप में उन्होंने अपना विशिष्ट स्थान बना लिया था । उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं: -
    काव्य : मौर्य-विजय, अनाथ, दूर्वाद्रल, विषाद, आर्द्रा, आत्मोत्सर्ग, पाथेय, मृणमयी, बापू उलूक, दैनिकी, नकुल, नोआखली में, जयहिन्द, गीता-संवाद, गोपिका, अमृत-पुत्र । उपन्यास-गोद, अंतिम आकांक्षा, नारी ।
    कहानीसंग्रह - मानुषी ।
    निबन्ध संग्रह - झूठ-सच ।
    नाटक - पुण्य पर्व ।
    श्री सियारामशरण गुप्त की रचनाओं में उनके व्यक्तित्व की सरलता, विनयशीलता, सात्विकता और करुणा सर्वत्र प्रतिफलित हुई है । वास्तव में गुप्त जी मानवीय संस्कृति के साहित्यकार हैं । उनकी रचनाएं सर्वत्र एक प्रकार के चिन्तन, आस्था-विश्वासों से भरी हैं, जो उनकी अपनी साधना और गांधी जी के साध्य साधन की पवित्रता की गूंज से ओत-प्रोत हैं ।

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