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Gondvana Ki Lokkathayen

Gondvana Ki Lokkathayen

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  • Pages: 332p
  • Year: 2008
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126715466
  •  
    आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति रुचि जाग्रत करने हेतु रोचक साहित्य उपलब्ध कराया जाता रहा है। उसी शृंखला में बैगा एवं गोंड जनजातियों की बहुचर्चित लोककथाओं के संग्रह को यहां प्रकाशित किया जा रहा है। गोंड तथा बैगा जनजाति के अनेक पहलू अभी भी शेष समाज के लिए अविदित हैं। इनकी प्रथाएँ, परम्पराएँ, धार्मिक आस्थाएँ, लोक-नृत्य एवं संगीत, कला आदि, हममें न केवल कौतूहल उत्पन्न करती हैं, बल्कि हमें आह्लादित भी करती हैं। इनके साथ-साथ इस जनजाति के पास विशिष्ट लोककथाओं, गाथाओं, किंवदंतियों एवं मिथकों आदि का भी विपुल भंडार है जो एक धरोहर के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हुए सदियों से अक्षुण्ण चला आ रहा है। इनकी कथाओं में जहाँ समाज के स्वरूप, संगठन एवं सामाजिक आस्थाओं के दर्शन होते हैं वहीं ये व्यक्ति व समाज को सृष्टि तथा सृष्टि के रचयिता के साथ भी जोड़ती हैं। गोंड एवं बैगा जनजाति की लोककथाओं के अकूत भंडार में से कुछ रोचक लोककथाएँँ यहाँ प्रस्तुत की जा रही हैं। यह कार्य भरपूर परिश्रम, अनन्य आस्था और परिपूर्ण शोधवृत्ति से किया गया है। आशा है, जनजातीय संस्कृति में रुचि रखनेवालों और सुधी पाठकों को यह प्रयास अवश्य पसंद आएगा।

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    Vijay Chourasiya

    डॉ. विजय चौरसिया

    जन्मस्थान: ग्राम बंड़ा जिला - कटनी (मध्य प्रदेश)।

    शिक्षा: बी-एस.सी., बी.ए.एम.एस., डी.एच.बी.।

    उपलब्धियाँ: 1. विगत तीस वर्षों से मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य की लोक कलाओं एवं लोक नृत्यों के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रयासरत, 2. मध्य प्रदेश तथा देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे कादम्बनी, धर्मयुग, हिन्दुस्तान टाइम्स, दिनमान, इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, नवभारत, नई दुनिया में एक हजार से अधिक लेखों का प्रकाशन, 3. मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में करीब 30 लोक नाट्य एवं लोक नर्तक दलों का नेतृत्व, 4. प्रकृति पुत्र बैगा तथा रामायनी लक्षमन जी की सत परिच्छा का मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल द्वारा प्रकाशन, 5. मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध जनजाति गोंड में प्रचलित गोंड राजाओं के इतिहास का साक्ष्य बाना गीत पर आधारित ग्रन्थ आख्यान मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला अकादमी द्वारा प्रकाशित, 6. मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध समाजसेवी संस्था वीर सावरकर लोक कला परिषद में निर्देशक, 7. स्वराज संस्थान संचालनालय संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा स्वाधीनता फैलोशिप 2006-07 (आदिवासी लोक गीतों में सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना विषय पर प्रदान की गई), 8. मध्य प्रदेश के लोक नृत्य एवं लोक कलाओं का देश-विदेश में प्रदर्शन।

    सम्प्रति: चिकित्सा कार्य, पत्रकारिता, लोक संस्कृति पर लेखन, प्रदेश के लोक नृत्यों एवं लोक संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रयासरत।

    सम्पर्क: चौरसिया सदन, गाड़ासरई, जिला डिंडोरी (मध्य प्रदेश)

    फोन: 07645-235270

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