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Grihdaah

Grihdaah

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  • Pages: 240p
  • Year: 2013
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183616041
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    गृहदाह सामाजिक विसंगतियों, विषमताओं और विडम्बनाओं का चित्रण करनेवाला शरतचन्द्र का एक अनूठा मनोवैज्ञानिक उपन्यास है । मनोविज्ञान की मान्यता है कि व्यक्ति दो प्रकार के होते हैं–एक अन्तर्मुखी और दूसरा बहिर्मुखी । गृहदाह के कथानक की बुनावट मुख्यत% तीन पात्रों को लेकर की गई है । महिम, सुरेश और अचला । महिम अन्तर्मुखी है, और सुरेश बहिर्मुखी है । अचला सामाजिक विसंगतियाँ, विषमताओं और विडम्बनाओं की शिकार एक अबला नारी है, जो महिम से प्यार करती है । बाद में वह महिम से शादी भी करती है । वह अपने अन्तर्मुखी पति के स्वभाव से भली भाँति परिचित है । मगर महिम का अभिन्न मित्र सुरेश महिम को अचला से भी ज्यादा जानता–पहचानता है । सुरेश यह जानता है कि महिम अभिमानी भी है और स्वाभिमानी भी । सुरेश और महिम दोनों वैदिक /ार्मावलम्बी हैं जबकि अचला ब्राह्म है । सुरेश ब्रह्म समाजियों से घृणा करता है । उसे महिम का अचला के साथ मेल–जोल कतई पसन्द नहीं है । लेकिन जब सुरेश एक बार महिम के साथ अचला के घर जाकर अचला से मिलता है, तो वह अचला के साथ घर बसाने का सपना देखने लगता है । लेकिन विफल होने के बावजूद सुरेश अचला को पाने की अपनी इच्छा को दबा नहीं सकता है । आखिर वह छल और कौशल से अचला को पा तो लेता है, लेकिन यह जानते हुए भी कि अचला उससे प्यार नहीं करती है, वह अचला को एक विचित्र परिस्थिति में डाल देता है । सामाजिक विसंगतियों, विषमताओं और विडम्बनाओं का शरतचन्द्र ने जितना मार्मिक वर्णन इस उपन्यास में किया है वह अन्यत्र दुर्लभ है । महिम अचला की बात जानने की कोशिश तक नहीं करता है । निर्दोष, निरीह नारी की विवशता और पुरुष के अभिमान, स्वाभिमान और अहंकार का ऐसा अनूठा चित्रण गृहदाह को छोड़ और किसी उपन्यास में नहीं मिलेगा ।

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    Sharatchandra

    शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय

    जन्म: 15 सितम्बर, 1876 को हुगली जिले के देवानंदपुर (पश्चिम बंगाल) में हुआ।

    प्रमुख कृतियाँ: पंडित मोशाय, बैकुंठेर बिल, मेज दीदी, दर्पचूर्ण, श्रीकान्त, अरक्षणीया, निष्कृति, मामलार फल, गृहदाह, शेष प्रश्न, देवदास, बाम्हन की लड़की, विप्रदास, देना पावना, पथेर दाबी और चरित्रहीन।

    ‘चरित्रहीन’ पर आधारित 1974 में फिल्म बनी थी। ‘देवदास’ फिल्म का निर्माण तीन बार हो चुका है। इसके अतिरिक्त ‘परिणीता’ 1953 और 2005 में, ‘बड़ी दीदी’ (1969) तथा ‘मँझली बहन’ आदि पर भी चलचित्रों के निर्माण हुए हैं। ‘श्रीकान्त’ पर टी.वी. सीरियल भी बन चुका है।

    निधन: 16 जनवरी, 1938

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