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Guruji Ki Kheti-Bari

Guruji Ki Kheti-Bari

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  • Pages: 120
  • Year: 2018, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126727148
  •  
    आलोचक के रूप में अपनी सृजनात्मक अप्रोच के लिए सराहे जानेवाले विश्वनाथ त्रिपाठी की सवा-सराहना बतौर गद्यकार हमेशा ही सुरक्षित रहती है ! आलोचना से इतर अपनी हर पुस्तक के साथ उन्होंने ‘दुर्लभ गद्यकार’ की अपनी पदवी ऊंची की है ! उनकी भाषा और कहाँ चलते-फिरते साकार मनुष्य की प्रतीति देती है ! ऐसे कम ही लेखक हैं जिनकी लिखी पंक्तियों के बीच रहते हुए आप एक तनहा पाठक नहीं रह जाते, अपने आसपास किसी की उपस्थिति आपको लगातार महसूस होती रहती है ! त्रिपाठी जी अपने शब्दों में सामने खड़े महसूस होते हैं ! इन पृष्ठों में आप राजनीती का वह ज़माना भी देखेगे जब ‘अनशन, धरना, जुलूस, प्रदर्शन, क्रांति, उद्धार-सुधार, विकास, समाजवाद, अहिंसा जैसे शब्दों का अर्थपतन, अनर्थ, अर्थघृणा और अर्थशरम नहीं हुआ था !’ और विश्वविद्यालय के छात्र मेजों पर मुट्ठियाँ पटक-पटककर मार्क्सवाद पर बहस किया करते थे ! जवाहरलाल नेहरु, कृपलानी, मौलाना आजाद जैसे राजनितिक व्यक्तित्वों और डॉ. नगेन्द्र, विष्णु प्रभाकर, बालकृष्ण शर्मा नवीन, शमशेर और अमर्त्य सेन जैसे साहित्यिकों-बौद्धिकों की आँखों बसी स्मृतियों से तारांकित यह पुस्तक त्रिपाठी जी के अपने अध्यापन जीवन के अनेक दिलचस्प संस्मरणों से बुनी गई है ! किस्म-किस्म के पढनेवाले और किस्म-किस्म पढनेवाले यहाँ हैं ! हरयाणा से कम्बल ओढ़कर और साथ में doodh की चार बोतलें कक्षा में लेकर आनेवाला विद्यार्थी है तो किरोड़ीमल के छात्र रहे अमिताभ बच्चन, कुलभूषण खरबंदा, दिनेश ठाकुर और राजेंद्र नाथ भी हैं ! शुरुआत उन्होंने बिस्कोहर से अपने पहले गुरु रच्छा राम पंडित के स्मरण से की है ! इसके बाद नैनीताल में अपनी पहली नियुक्ति और तदुपरांत दिल्ली विश्वविद्यालय में बीते अपने लम्बे समय की अनेक घटनाओं को याद किया है जिनके बारे में वे कहते है : ‘याद करता हूँ तो बादल से चले आते हैं मजमूँ मेरे आगे !’

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    Vishwanath Tripathi

    विश्वनाथ त्रिपाठी

    जन्म: 16 फरवरी, 1931, जिला बस्ती (अब सिद्धार्थनगर) के बिस्कोहर गाँव में।

    पिता: श्री तेज बहादुर तिवारी।

    माता: श्रीमती सिरताजी देवी।

    13 जुलाई, 1956 को श्रीमती माहेश्वरी त्रिपाठी से विवाह।

    शिक्षा: पहले गाँव में, फिर बलरामपुर कस्बे में, उच्च शिक्षा कानपुर और वाराणसी में। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से पी-एच.डी.।

    कृतियाँ: प्रारम्भिक अवधी, हिन्दी आलोचना, हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास, लोकवादी तुलसीदास, मीरा का काव्य, देश के इस दौर में (परसाई केन्द्रित), कुछ कहानियाँ: कुछ विचार, पेड़ का हाथ (केदारनाथ अग्रवाल केन्द्रित), जैसा कह सका (कविता संकलन), नंगातलाई का गाँव (स्मृति-आख्यान), व्योमकेश दरवेश (आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का पुण्य स्मरण)।

    सम्पादन: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के साथ अद्दहमाण (अब्दुल रहमान) के अपभ्रंश काव्य ‘संदेश रासक’ का सम्पादन, कविताएँ 1963, कविताएँ 1964, कविताएँ 1965 (तीनों अजित कुमार के साथ), हिन्दी के प्रहरी: रामविलास शर्मा (अरुण प्रकाश के साथ)।

    सम्मान: गोकुलचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान।

    सम्पर्क: बी.-5, एफ-2, दिलशाद गार्डन, दिल्ली-45

    फोन: 011-22581418

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