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Hindi Main Ashuddhiyan

Hindi Main Ashuddhiyan

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Special Price Rs. 675

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  • Pages: 350p
  • Year: 2015, 6th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171196661
  •  
    मानक हिंदी इतने बड़े क्षेत्र में और इतनी अधिक जनसँख्या द्वारा व्यवहृत की जा रही है कि उस का एकमेव राष्ट्रीय स्वरुप निर्मित होना और उसका स्थिर रह पाना असंभव है ! कारण डॉ हैं-एक तो उस के प्रयोक्ताओं पर उन की मातृबोलियों का व्याघात, तथा दूसरे उनको दी जाने वाली समुचित शिक्षा का आभाव और अशुद्धियों (प्रयोगों में अंतर होने) की सामाजिक पृष्ठभूमि ! प्रस्तुत पुस्तक में समूचे हिंदी क्षेत्र से नमूनार्थ संकलित सामग्री को विश्लेषित करके हजारों उदाहरणों के साथ यह स्पष्ट किया गया है कि हिंदी की बीस बोलियों के मत्रिभाशी मानक हिंदी लिखते समय वर्तनी, व्याकरण और अर्थ से सम्बंधित किस-किस प्रकार की कुल 44 त्रुटियाँ करते हैं, जिन में 111 उपत्रुतियाँ अंतर्भुक्त हैं ! इन उप्त्रुतिओन को सरलतम विधि से केवल आगम (कुल 7), आदेश (कुल 95), और लोप (कुल 9) तीन आधारों pa समझाया गया है ! प्रमुखतः उपचारात्मक मूल्य-वाली यह पुस्तक हिंदी को अशुद्धियों से दूर रखना चाहने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है !

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    Ramesh Chandra Mahrotra

    रमेश चंद्र मेहरोत्रा

    जन्म : 17 अगस्त, 1934, मुरादाबाद।

    शिक्षा : एम.ए., एम.लिट्, पी-एच.डी., डी.लिट्. (हिंदी—भाषाविज्ञान)।

    सेवा : सागर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रॉफॅसर (7 वर्ष), रविशंकर विश्वविद्यालय में रीडर-हॅड (12 वर्ष), वहीं प्रॉफॅसर-हॅड (16 वर्ष), आगे भी मानसेवी प्रॉफॅसर (रॅक्टर और कुलपति के पद अस्वीकार किए)।

    शोध-निर्देशन : 5 डी.लिट्., 39 पी-अॅच.डी., 24 अॅम.फिल., 6 शोध-परियोजनाएँ।

    प्रकाशन : चार दर्जन से अधिक पुस्तकें (लेखन, सह-लेखन, संपादन आदि) मानक हिन्दी, भाषाविज्ञान, साहित्य, छत्तीसगढ़ी आदि पर। अनेक पत्र-पत्रिकाओं व ग्रंथों में सैकड़ों लेख।

    सम्मान : 8 राज्यों से 17 राष्ट्रीय प्रादेशिक

    स्तर के अलंकरण; शोधग्रंथ ‘लिंग्विस्टिक्स

    एंड लिंग्विस्टिक्स’ से अभिनंदित; सहस्राधिक प्रशस्तियाँ प्राप्त।

    सदस्यता : केंद्र और प्रदेश के सरकारी और अन्य तीन दर्जन आयोगों, परिषदों आदि से शैक्षणिक संबद्धता; 22 विश्वविद्यालयों से शोध-निर्वाह।

    प्रसारण : सैकड़ों वार्ताएँ आदि।

    सामाजिक कार्य : नि:शुल्क विधवा-विवाह

    केंद्र का 1992 में स्थापन और आजीवन संचालन, तद् हेतु 9 वार्षिक स्वर्णपदक एवं 3 वार्षिक स्नातक-स्तरीय छात्रवृत्तियाँ प्रदान; मरणोपरांत सपत्नीक शरीरदान और नेत्रदान।

    निधन : 4 दिसम्बर, 2014

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