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Hum Jo Nadiyon Ka Sangam Hein

Hum Jo Nadiyon Ka Sangam Hein

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  • Pages: 87p
  • Year: 2000
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 10: 8171195555
  •  
    अग्रणी कवि बोधिसत्व का यह दूसरा संग्रह स्वयं कवि की काव्य–यात्रा का नया पड़ाव तो है ही, समकालीन हिंदी कविता के लिए भी एक घटना है । यह संग्रह अपनी कविताओं के तीव्र आवेग, भाव–विविधता एवं वस्तु– बहुलता के कारण महत्त्वपूर्ण माना जाएगा । बोधिसत्व की कविताएँ मानो अनेक नदियों का संगम हैं । लोकगीतों की ऊष्मा तथा रागात्मकता, वर्तमान जीवन के ‘दुख–तंत्र’ की कठोर प्रतीति और वैचारिक दृढ़ता एवं प्रतिरोधµइन सबके संयोग से ये कविताएँ हमारे लिए एक वैकल्पिक पाठ की सृष्टि करती हैं । ‘हाहाकार के बीच से गुजरती’ इन कविताओं में दर्ज हैं ‘बेनूर आँखों के ख़्वाब’, ‘सिले होंठों की मुस्कुराहट’ और ‘बँधे हाथों की छटपटाहट’ । लोकगीत और बोलियों की शक्ति का उपयोग, जिसके लिए बोधिसत्व की आरंभिक कविताएँ चिह्नित की गई थीं, उनका अद्यतन रूप यहाँ मिलता है, कुछ ज्वाया और सख़्त । इनमें बेचैन कर देने वाली ऐंद्रिकता हैµ‘ताजे आटे की गर्मी थी उसकी खुशी/वसंत उसके लिए अब उखड़े नाखून की तरह है’ । एक विरल करुणा और क्रोध । इनमें जीवन के प्रति समर्थन और लालसा है जैसे कि ‘ऐसा ही होता है’ कविता में, जो साधारण मनुष्य के दैनंदिन प्रेम को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है । ‘गंध’ शीर्षक कविता स्वयं बोधिसत्व की कविताओं में अलग से उल्लेखनीय है । यह एक बड़ी कविता है, हमारे जीवन की दारुण विपत्ति, विडंबना एवं निजी और सामाजिक के सीमा–प्रदेश पर निरंतर विद्यमान द्वंद्व की कविता । एक बात औरµये कविताएँ गहरे राजनैतिक आशय एवं नैतिक संकल्प की कविताएँ हैं । बोधिसत्व का ही शब्द लेकर कहें तो यह वह कविता है ‘जो समाज के हारे–गाढ़े काम दे’ ।

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    Bodhisatva

    मूलनाम- अखिलेश कुमार मिश्र

    जन्म- 11 दिसम्बर 1968 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुरियावाँ थाने के एक गाँव भिखारी रामपुर में जन्म। पितामह पंडित राम नरेश मिश्र वैद्य थे और पिता पंडित हीरा राम मिश्र उत्तर प्रदेश सरकार के नौकर थे। माँ राम सवांरी देवी धर्मपरायण महिला है।

    शिक्षा- प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की ही पाठशाला से। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. और वहीं से तार सप्तक के कवियों के काव्य सिद्धान्त पर पी.एच.डी की उपाधि ली। यूजीसी के रिसर्च फैलो रहा।

    प्रकाशन- सिर्फ कवि नहीं (1991), हम जो नदियों का संगम हैं (2000), दुख तंत्र (2004), खत्म नहीं होती बात (2010) ये चार कविता संग्रह प्रकाशित हैं। तारसप्तक-काव्य सिद्धान्त और कविता नामक शोध प्रबन्ध (2011) लम्बी कहानी वृषोत्सर्ग (2005) छपी

    संपादन- गुरवै नमः (2002), भारत में अपहरण का इतिहास (2005), रचना समय के शमशेर जन्म शती अंक का संपादन (2010)।

    प्रकाशनाधीन- कविता की छाया में (लेख, समीक्षा और व्याख्या)

    अन्य लेखन- शिखर (2005), धर्म (2006) जैसी फिल्मों और दर्जनों टीवी धारावाहिकों का लेखन

     

    सम्मान- कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल सम्मान, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, संस्कृति अवार्ड, हेमंत स्मृति सम्मान प्राप्त है।

    अन्य- कुछ कविताएँ देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित हैं। कुछ कविताएँ मास्को विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है। दो कविताएँ गोवा विश्व विद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल थीं।

    फिलहाल- पिछले 10 साल से मुम्बई में बसेरा है। सिनेमा, टेलीविजन और पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखाई का काम।

     घर का पता- श्री गणेश को.हा.सो., स्वातन्त्रय वीर सावरकर मार्ग, सेक्टर नं. 3, प्लाट नं. 233 प्लैट नं. 3, चारकोप, कांदीवली (पश्चिम) मुम्बई-400067। मोबाइल-0-9820212573

    ईमेल पता abodham@gmail.com

    ब्लाॅग का पता http://vinay-patrika.blogspot.com

     

     

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