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  • Pages: 135p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126705948
  •  
    कुँवर नारायण, हिन्दी कविता में एक विशिष्ट नाम-जो लगभग आधी सदी से अपनी सशक्त उपस्थिति से हमारा ध्यान आकृष्ट करता रहा है । 'इन दिनों' -कवि का सातवाँ कविता-संग्रह-हमें फिर से एक बार उनके विशद काव्य-संसार में ले जाता है । भाषा और विषय की विविधता अब तक उनकी कविताओं के विशेष गुण माने जा चुके हैं । स्थानों और समयों को लेकर ये कविताएँ अपनी एक उन्मुक्त दुनिया रचती हैं जिनमें अनवरत जीवन की खुली आवाजाही है । इनमें टूटने का दर्द भी हे, और उसे बनाने का उत्साह भी । इनमें यथार्थ की पक्की पकड़ है, उसका खुरदुरा स्पर्श, साथ ही उसका सहज सौन्दर्य भी । जीवन और विचारों से जूझती ये कविताएँ उस सन्‍धिरेखा पर अपने को सम्भव बनाती हैं जो एक दूसरे का निषेध नहीं, गहरी मानवीय संवेदनाओं का आधार है । राजनीतिक और सामाजिक विकृतियों और अराजकता के समय ये कविताएँ समस्याओं से वाबस्तगी को पूरी जिम्मेदारी से प्रतिबिम्बित करती हैं । कभी आयरनी, कभी हमदर्दी के स्वर में वे मनुष्य की सबसे संवेदनशील प्रतिक्रियाओं को जगाती हैं । कुँवर नारायण की कविताओं में सीधी घोषणाएँ और फैसले नहीं हैं, जीवन की बहुतरफा समझ का वह धीरज है जो एक प्रौढ़ जीवन-विवेक और दृढ़ नैतिक चेतना से बनता है । समाज, राजनीति, व्यवसायीकरण आदि को लेकर उनकी कविताओं में दूरन्देशी फिक्र है जो लोक-जीवन के व्यापक हितों को केन्द्र में रखकर सोचती है-आज के मनुष्य की पीड़ा और जिजीविषा के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने की कोशिश करती है । क्लासिकल अनुशासन में रहते हुए भी ये कविताएँ आदमी के बुनियादी आवेगों को भी इस तरह व्यक्त करती हैं कि एक सतर्क पाठक उनके साथ आसानी से एकात्म हो सकता है । कई जगह मिथकीय और ऐतिहासिक सन्दर्भों द्वारा कवि वर्तमान में हमारे यथार्थ बोध को अधिक विस्तृत, गहरा और विवेकी बनाता है । ये कविताएँ एक बार फिर आपका परिचय हिन्दी के उस अप्रतिम कवि से कराएंगी जिसकी 'चक्रव्यूह', 'आत्मजयी', 'अपने सामने', 'कोई दूसरा नहीं' जैसी कृतियाँ हिन्दी साहित्य की मूल्यवान धरोहर बन चुकी हैं ।

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    Kunwar Narain

    कुँवर नारायण

    आज के साहित्यिक परिदृश्य को दूर तक प्रभावित करनेवाले हिन्दी के शिखर कवि।

    जन्म: 1927। आधी सदी से अधिक समय से लेखन में सक्रिय हैं। कविता के साथ ही लगातार विभिन्न साहित्यिक, वैचारिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी महत्त्वपूर्ण लेखन कर रहे हैं। कई पत्रिकाओं के सम्पादन और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। उनकी अनेक कृतियों के भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित हो रहे हैं।

    प्रकाशित पुस्तकें - काव्य संग्रह: चक्रव्यूह, परिवेश: हम-तुम, तीसरा सप्तक, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों, हाशिए का गवाह; खंडकाव्य: आत्मजयी और वाजश्रवा के बहाने; कहानी संग्रह: आकारों के आसपास; समीक्षा: आज और आज से पहले, मेरे साक्षात्कार, साहित्य के अन्तर्विषयक सन्दर्भ; साक्षात्कार: तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं; संचयन: कुँवर नारायण: संसार, कुँवर नारायण: उपस्थिति, चुनी हुई कविताएँ, प्रतिनिधि कविताएँ, नो अदर वर्ल्ड: अंग्रेज़ी अनुवाद और संचयन: अपूर्व नारायण।

    अनेक पुरस्कारों से सम्मानित जिनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार, प्रेमचन्द पुरस्कार, शलाका सम्मान, राष्ट्रीय कबीर सम्मान, रोम का अन्तर्राष्ट्रीय ‘प्रीमिओ प़$ेरोनिआ’ पुरस्कार और भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार हैं। राष्ट्रीय सम्मान ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत। साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता (2010)।

    आरम्भिक जीवन फ़ैज़ाबाद और अयोध्या में बीता, उसके बाद अधिक समय लखनऊ में रहे। आजकल दिल्ली में पत्नी भारती और पुत्र अपूर्व के साथ रहते हैं।

    सम्पर्क: एच-1544, चितरंजन पार्क, नई दिल्ली-19

    फोन: (011) 26272508

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