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  • Pages: 207
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183618960
  •  
    नब्बे का दशक सामाजिक और राजनीतिक मूल्यों के लिए इस मायने में निर्णायक साबित हुआ कि अब तक के कई भीतरी विधि-निषेध इस दौर में आकर अपना असर अन्तत: खो बैठे। जीवन के दैनिक क्रियाकलाप में उनकी उपयोगिता को सन्दिग्ध पहले से ही महसूस किया जा रहा था लेकिन अब आकर जब खुले बाज़ार के चलते विश्व-भर की नैतिकताएँ एक दूसरे के सामने खड़ी हो गईं और एक दूसरे की निगाह से अपना मूल्यांकन करने लगीं तो सभी को अपना बहुत कुछ व्यर्थ लगने लगा और इसके चलते जो अब तक खोया था उसे पाने की हताशा सर चढ़कर बोलने लगी। मंडल के बाद जाति जिस तरह भारतीय समाज में एक नए विमर्श का बाना धरकर वापस आई वह सत्तर और अस्सी के सामाजिक आदर्शवाद के लिए अकल्पनीय था। वृहत् विचारों की जगह अब जातियों के आधार पर अपनी अस्मिता की खोज होने लगी और राजनीति पहले जहाँ जातीय समीकरणों को वोटों में बदलने के लिए चुपके-चुपके गाँव की शरण लिया करती थी, उसका मौ$का उसे अब शिक्षा के आधुनिक केन्द्रों में भी, खुलेआम मिलने लगा। यह उपन्यास ऐसे ही एक शिक्षण-संस्थान के नए युवा की नई ज़ुबान और नई र$फ्तार में लिखी कहानी है। बड़े स्तर की राजनीति द्वारा छात्रशक्ति का दुरुपयोग, छात्रों के अपने जातिगत अहंकारों की लड़ाई, प्रेम त्रिकोण, छात्र-चुनाव, हिंसा, साजि़शें, हत्याएँ, बलात्कार जैसे इन सभी कहानियों के स्थायी चित्र बन गए हैं, वह सब इस उपन्यास में भी है और उसे इतने प्रामाणिक ढंग से चित्रित किया गया है कि $खुद ही हम यह सोचने पर बाध्य हो जाते हैं कि अस्मिताओं की पहचान और विचार के विकेन्द्रीकरण को हमने सोवियत संघ के विघटन के बाद जितनी उम्मीद से देखा था, कहीं वह कोई बहुत बड़ा भटकाव तो नहीं था? लेकिन अच्छी बात यह है कि इक्कीसवीं सदी के डेढ़ दशक बीत जाने के बाद अब उस भटकाव का आत्मविश्वास कम होने लगा है और नई पीढ़ी एक बड़े फलक पर, ज़्यादा वयस्क और विस्तृत सोच की खोज करती दिखाई दे रही है।

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    Naveen Chaudhary

    नवीन  चौधरी

    बिहार के मधुबनी जि़ले के रुद्रपुर गाँव में 31 जुलाई, 1978 को जन्मे नवीन चौधरी राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में परास्तानक हैं। पढ़ाई के दौरान छात्र-राजनीति में खूब सक्रिय रहे। इन्होंने एमबीए की डिग्री भी हासिल की है। 'दैनिक भास्कर’, 'दैनिक जागरण’ और आदित्य बिड़ला गु्रप के ब्रांड और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में विभिन्न पदों पर रह चुके नवीन फोटोग्राफी, व्यंग्य-लेखन एवं ट्रैवलॉग राइटिंग भी करते हैं। इनकी ट्रेवल तस्वीरें गेटी-इमेजेज द्वारा इस्तेमाल होती हैं। इनका लोकप्रिय फेसबुक पेज 'कटाक्ष’ और ब्लॉग 'हिन्दी वाला ब्लॉगर’ के नाम से है। इनके कई व्यंग्य वायरल हुए और कई न्यूज़ वेबसाइट पर भी प्रकाशित होते रहे हैं। नवीन के पुराने आर्टिकल उनकी वेबसाइट www.naveenchoudhary.com पर पढ़े जा सकते हैं।

    वर्तमान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नोएडा में मार्केटिंग हेड और दिल्ली एनसीआर में रहनेवाले नवीन चौधरी से सम्पर्क का ज़रिया है—naveen2999@gmail. com

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