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Jungle Ka Dard

Jungle Ka Dard

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  • Pages: 128p
  • Year: 2019, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388933155
  •  
    ‘जंगल का दर्द’ में कवि सर्वेश्वर की अपने अंतर्जगत और बाह्य जगत के जानवरों से लड़ाई, समसामयिक हिंदी कविता की उपलब्धि है । ‘कुआनो नदी’ की कविताएँ डूबते सूरज की लम्बी परछाइयाँ थीं । अब ‘जंगल का दर्द’ में अंधकार सिमटकर बुलेट–सा छोटा, ठोस और भारी हो गया है । काव्य–विन्यास में इस परिवर्तन को कवि की यातना और दृष्टि से जोड़कर ही समझा जा सकता है । भेड़िए, कुत्ते, तेंदुए, चिड़ियाँ, तितलियाँ, इस जंगल में सबसे उसका सामना होता है उनसे वह जूझता है, बचता है, सीखता है और मानव नियति की राह टटोलता, झाड़ियों की रगड़ से अपनी देह का संगीत सुनता, खुद को उधेड़ता–बुनता आगे बढ़ता जाता है । यह यात्रा जारी है, और हिंदी कविता की भावी यात्रा के प्रति आश्वस्त करती है । यह काव्य–संग्रह ढहते मूल्यों के बीच खड़े रहने की सामर्थ्य देता है और यह स्पष्ट करता है कि कविता का मुख्य प्रयोजन सौंदर्य–बोध के विस्तार के साथ–साथ मानव–आत्मा को निर्भीक करना और उसे कर्म से जोड़ना है ।

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    Sarveshwardayal Saxena

    जन्म: 15 सितम्बर, 1927, बस्ती (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एंग्लो संस्कृत हाईस्कूल बस्ती, क्वींस कॉलेज, वाराणसी तथा प्रयाग विश्वविद्यालय।

    जीविकोपार्जन के लिए मास्टर, क्लर्क, आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर, ‘दिनमान’ में प्रमुख उप-सम्पादक और फिर कुछ दिनों ‘पराग’ के सम्पादक। ‘तीसरा सप्तक’ के कवि और नई कविता के अधिष्ठाता शीर्षस्थ कवियों में एक। ‘खूंटियों पर टँगे लोग’ कविता-संग्रह के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार।

    प्रकाशित पुस्तकें: काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ (बाद में ये चारों कविता-संग्रह क्रमशः ‘कविताएँ: एक’ और ‘कविताएँ: दो’ में संकलित प्रकाशित), कुआनो नदी, जंगल का दर्द, खूँटियों पर टँगे लोग, कोई मेरे साथ चले (कविता-संग्रह); उड़े हुए रंग (उपन्यास); सोया हुआ जल, पागल कुत्तों का मसीहा (लघु उपन्यास); लड़ाई, अँधेरे पर अँधेरा (कहानी-संग्रह); बकरी (नाटक); भों-भों-खों-खों, लाख की नाक, कल भात आएगा (बाल-नाटक); बतूता का जूता, महँगू की टाई, बिल्ली के बच्चे (बाल कविता-संग्रह); कुछ रंग, कुछ गंध (यात्रा-संस्मरण)।

    सम्पादित: शमशेर, नेपाली कविताएँ।

    निधन : 24 सितम्बर, 1983

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