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Kabeer Mimansa

Kabeer Mimansa

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  • Pages: 248
  • Year: 2018, 4th Ed.
  • Binding:  Textbook
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180315893
  •  
    इस संस्करण में कबीर से सम्बंधित दस निबन्ध कबीर-वाणी की लिखित एवं मौखिक परम्परा तथा कबीर का व्यक्तित्व, कबीर-वाणी के अध्ययन की परम्परा, प्रगतिवादी 'कबीर', कबीर का आदर्श मानब और मानवतावाद, कबीर को कबीर ही रहने दे, कबीर: अन्तर्विरोधों के बावजूद शामिल किया गया है । यह कबीर से सम्बन्थित सभी पक्षो का समग्र मूल्याकन करनेवाली कृति है । प्रस्तुत कृति में कबीर के जीवन-वृत्त और कृतियों के प्रामाणिक परिचय के साथ ही उनके युग-विधायक यहु-आयामी व्यक्तित्व को व्यंजित करने बाली सभी संघठक तत्वों का गम्भीर, सन्तुलित, सारग्राही, स्पष्ट एवं आग्रह-युक्त अध्ययन किया गया है । यह प्रयास उस महिमामय व्यक्तित्व के प्रति एक विनम्र प्रणति है । आशा है विद्वाजनों के बीच यह कृति इसी रूप में स्वीकार्य होगी तथा पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी ।

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    Ramchandra Tiwari


    डॉ. रामचन्द्र तिवारी
    जन्म : 1924 ई., बनारस जिले के एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में ।
    शिक्षा : हाईस्कूल, हरिश्चन्द्र हाईस्कूल बनारस से इण्टर लखनऊ के कान्यकुब्ज कॉलेज से; बी. ए., एम. ए., पी - एच. डी. लखनऊ विश्वविद्यालय से ।
    अध्यापन : 1952 ई. में गोरखपुर में महाराणा प्रताप कॉलेज में नियुक्त । 1958 ई. में गोरखपुर विश्वविद्यालय कै हिन्दी विभाग में नियुक्ति । अब रिटायर!
    कृतियाँ : कविवर लेखराज; गंगाभरण तथा अन्य कृतियां, शिवनारायणी सम्प्रदाय और उसका साहित्य (शोध-प्रबन्ध, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत), रीतिकालीन हिन्दी कविता और सेनापति (उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत), हिन्दी का गद्य-साहित्य (उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत), मध्ययुगीन काव्य-साधना, साहित्य का मूल्यांकन (जजमेण्ट इन लिटरेचर क अनुवाद), नाथ-योग एक परिचय ( ' ऐन् इंट्रोडक्शन टु नाथ योग, का अनुवाद) आधुनिक कवि और काव्य (सम्पादित), काव्यधारा (सम्पादित), निबन्ध नीहारिका  (सम्पादित), तजीकरा-ए-शुअरा-ए हिन्दी (मौलवी करीमुददीन द्वारा लिखित हिन्दी और उर्दू- के इतिहास का सम्पादित रूप) आलोचक का दायित्व, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल आलोचना कोश ।
    निधन : 4 जनवरी 2009

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