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Katra Bi Arzooo

Katra Bi Arzooo

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  • Pages: 234p
  • Year: 2011, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126705221
  • ISBN 13: 9788126705221
  •  
    ‘कटरा बी आर्जू’ एक मामूली कटरे की कहानी होते हुए भी लगभग पुरे देश की कहनी है- अपने समय की कहानी है | यह उन 'गूँगी बस्तियों' के 'गूँगे लोगों' की कहानी है जहाँ 'उजाले' का कहीं नामो-निशान तक नहीं है | ऐसी बस्तियों शहर इलाहाबाद में ही नहीं, हर बड़े शहर में हैं-दिलों में छिपे अँधेरे कोनों की तरह | और हर अँधेरा जैसे अपने भीतर रोशनी का सपना पालता है, वैसे ही बिल्लो और देशराज भी एक सपना पलते हुए बड़े होते हैं-अपना एक घर होने का सपना | सपने को सच बनाने के लिए उन्हें जी-तोड़ संघर्ष करना पड़ता है और जब कामयाबी हासिल होने को होती है तो बुलडोजर उसे चकनाचूर कर जाता है-अँधेरा, अँधेरा ही रह जाता है! इस उपन्यास की कथा इमरजेंसी से पहले की पृष्ठभूमि में शुरू होती है और ‘जनता’ के उदय पर आकर ख़त्म होती है | कथाकार का उद्देश्य सिर्फ कहानी कहना है, अपनी बातें आरोपित करना नहीं | वह तटस्थ भाव से उन यातनामय स्थितियों का चित्रण करता है, जिनमें दर्द का अहसास मिट जाता है-दर्द ही दावा बन जाता है | दर्द केवल बिल्लो और देशराज का नहीं; प्रेमा नारायण, शम्सू मियां, भोलू पहलवान, इतवारी बाबा, बाबूराम, आशाराम वगैरह के भी अपने-अपने दर्द हैं जो अपनी हद पर पहुंचकर अपनी अर्थवत्ता खो देते हैं | इमरजेंसी के दौरान ऊपरी तबके के स्वार्थी तत्वों ने कैसा अंधेर मचाया, स्थानीय नेताशाही और नोकरशाही कैसे खुलकर खेली तथा आम आदमी का यह विश्वास कैसे टूटा कि ‘इमरजेंसी से गरीब आदमी का भला भया है’-ये सारी वास्तविकताएं पुरी प्रभावकता और सहजता के साथ इस उपन्यास में उभर कर आई हैं | वस्तुतः इस असरदार कृति के कलम की श्रेष्ठता एक बार फिर प्रमाणित हुई है |

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    Rahi Masoom Raza

    जन्म : 1 सितम्बर, 1925। जन्मस्थान : गाज़ीपुर (उत्तर प्रदेश)।

    प्रारम्भिक शिक्षा वहीं, परवर्ती अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से ही 'उर्दू साहित्य के भारतीय व्यक्तित्व’ पर पी-एच.डी.। अध्ययन समाप्त करने के बाद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में अध्यापन-कार्य से जीविकोपार्जन की शुरुआत। कई वर्षों तक उर्दू-साहित्य पढ़ाते रहे। बाद में फिल्म-लेखन के लिए बम्बई गए। जीने की जी-तोड़ कोशिशें और आंशिक सफलता। फिल्मों में लिखने के साथ-साथ हिन्दी-उर्दू में समान रूप से सृजनात्मक लेखन। फिल्म-लेखन को बहुत से लेखकों की तरह 'घटिया काम’ नहीं, बल्कि 'सेमी क्रिएटिव’ काम मानते थे। बी.आर. चोपड़ा के निर्देशन में बने महत्त्वपूर्ण दूरदर्शन धारावाहिक 'महाभारत’ के पटकथा और संवाद-लेखक के रूप में प्रशंसित।

    एक ऐसे कवि-कथाकार, जिनके लिए भारतीयता आदमीयत का पर्याय रही।

    प्रकाशित पुस्तकें : आधा गाँव, टोपी शुक्ला, हिम्मत जौनपुरी, ओस की बूँद, दिल एक सादा काग़ज़, कटरा बी आज़ूर्, असन्तोष के दिन, नीम का पेड़, कारोबारे तमन्ना, क़यामत (हिन्दी उपन्यास); मुहब्बत के सिवा (उर्दू उपन्यास); मैं एक फेरीवाला  (हिन्दी  कविता-संग्रह);  नया  साल, मौजे-गुल : मौजे सबा, रक्से-मय, अजनबी शहर : अजनबी रास्ते (उर्दू कविता-संग्रह); अट्ठारह सौ सत्तावन

    (हिन्दी-उर्दू महाकाव्य) तथा छोटे आदमी की बड़ी कहानी (जीवनी)।

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