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Kavi Ka Marg : Kamalesh Se Samwad (Raza Pustak Mala)

Kavi Ka Marg : Kamalesh Se Samwad (Raza Pustak Mala)

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Special Price Rs. 359

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  • Pages: 142
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126730926
  •  
    ''कमलेश अपनी पीढ़ी के सम्भवत: सबसे पढ़े-लिखे कवि-चिन्तक थे। जितना ज्ञान उन्होंने संसार भर से अपने पास इकट्ठा किया था उसकी तुलना में उन्होंने लिखा कम। उनके पास ज्ञान-पगी दृष्टि थी जो उनकी मूलत: कविदृष्टि को समृद्ध और विलक्षण बनाती थी। उनसे एक लम्बा संवाद और उनका एक निबन्ध इस पुस्तक में शामिल किया गया है जो इस माला के पहले सैट में इस विश्वास के साथ प्रकाशित की जा रही है कि उनके चिन्तन और गद्य की यह पुस्तक पाठकों को विचारोत्तेजक लगेगी। कमलेश में परम्परा की गहरी समझ और पैठ तथा आधुनिकता से प्रोत्साहित प्रश्नाकुलता में कोई दूरी नहीं है जो उन्हें एक अपवाद बनाती है।'' —अशोक वाजपेयी

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    Udayan Vajpayee

    उदयन वाजपेयी

    जन्म : ४ जनवरी, १९६०, सागर, मध्यप्रदेश।

    प्रकाशित पुस्तकें :

    कुछ वाक्य, पागल गणितज्ञ की कविताएँ (कविता-संग्रह); सुदेशना, दूर देश की गन्ध, सातवाँ बटन (कहानी-संग्रह); चरखे पर बढ़त, जनगढ़ कलम, पतझर के पाँव की मेंहदी (निबन्ध और यात्रा वृत्तान्त) ; अभेद आकाश ( फिल्मकार मणि कौल से बातचीत); मति, स्मृति और प्रज्ञा ( इतिहासकार धर्मपाल से बातचीत); का.ना. पणिक्कर पर थियेटर ऑफ रस और रतन थियाम पर थियेटर ऑफ ग्रेंजर ; वी आँविजि़ब्ल (फ्राँसीसी में कविताओं के अनुवाद की पुस्तक); मटमैली स्मृति में प्रशान्त समुद्र (जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा के हिन्दी में अनुवाद); कविताओं, कहानियों और निबन्धों के अनुवाद तमिल, बाङ्ला, ओड़िया, मलयालम, मराठी, अँग्रेज़ी, फ्राँसीसी, स्वीडिश, पोलिश, इतालवी, बुल्गारियन आदि भाषाओं में।

    कुमार शहानी की फिल्म 'चार अध्याय' और 'विरह भर्यो घर-आँगन कोने में' का लेखन।

    कावालम नारायण पणिक्कर की रंगमण्डली 'सोपानम्' के लिए उत्तररामचरितम्, अभिज्ञानशाकुन्तलम् की हिन्दी में पुनर्रचना, पणिक्कर के साथ कालिदास के तीनों नाटकों के आधार पर संगमणियम् नाटक का लेखन।

    २००० में लेविनी (स्वीट्ज़रलैण्ड) में और २००२ से पेरिस (फ्राँस) में 'राइटर इन रेसिडेंस', २०११ में नान्त (फ्राँस) में अध्येता की तरह आमन्त्रित। 

    मई २००३ में फ्राँस के राष्ट्रीय पुस्तकालय में भारतीय कवि की हैसियत से व्याख्यान। वाराणसी, भुबनेश्वर, पटना, मुम्बई, दिल्ली, पेरिस, मॉस्को, जिनिवा, काठमाण्डू आदि स्थानों पर कला, साहित्य, सिनेमा, लोकतन्त्र आदि विषयों पर व्याख्यान। 

    रज़ा फाउण्डेशन और कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार से सम्मानित।

    गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में अध्यापन।

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