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Kavitayen : Vol. 1

Kavitayen : Vol. 1

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  • Pages: 256p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126704527
  •  
    कविताएँ–1 में कवि सर्वेश्वर के दो संग्रहों की रचनाएँ एक साथ प्रस्तुत की गयी हैंµ‘काठ की घण्टियाँ’ और ‘बाँस का पुल’ । इन कविताओं में वह एक ओर अपनी आत्म–चेतना के प्रति अत्यधिक सजग प्रतीत होते हैं, तो दूसरी ओर व्यापक समष्टि–चेतना के प्रति उनका गहरा लगाव मन को आकर्षित करता है । इनमें रोमानी भाव–बोध जितना सत्य है उतना ही सत्य है समसामयिक परिवेश से जुड़े रहना । इन कविताओं ने छायावाद के बाद नयी कविता की पहचान बनाने में ऐतिहासिक भूमिका अदा की है और कहा गया है कि हिन्दी की ‘पिछले पच्चीस वर्षों की कविता का जहाँ भी उल्लेख होगा, सर्वेश्वर की चर्चा के बिना अधूरा ही रहेगा’ । ‘सर्वेश्वर ने नयी कविता नहीं लिखी वरन् स्वयं नयी कविता के विशिष्ट लक्षण किसी हद तक सर्वेश्वर के काव्य के माध्यम से ही प्रस्फुटित हुए हैं ।’ इन कविताओं ने दरअसल यह भी सिद्ध किया है कि साहित्यिकता और लोकप्रियता में कोई वैर नहीं होता ।

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    Sarveshwardayal Saxena

    सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

    सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का जन्म 15 सितम्बर, 1927 बस्ती, उत्तर प्रदेश में हुआ ।

    आपने इलाहबाद से बी.ए. और एम. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की ।

    जीविकोपार्जन के लिए मास्टर, क्लर्क, आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर, ‘दिनमान’ में प्रमुख उप-सम्पादक और फिर कुछ दिनों ‘पराग’ के सम्पादक। ‘तीसरा सप्तक’ के कवि और नई कविता के अधिष्ठाता शीर्षस्थ कवियों में एक।

    आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं --'काठ की घंटियाँ, 'बाँस का पुल', 'एक सूनी नाव', 'गर्म हवाएँ' (बाद में ये चारों कविता-संग्रह क्रमशः ‘कविताएँ : एक’ और ‘कविताएँ : दो’ में संकलित व प्रकाशित), 'कुआनो नदी', 'जंगल का दर्द', 'खूँटियों पर टँगे लोग', 'कोई मेरे साथ चले' (कविता); 'उड़े हुए रंग' (उपन्यास); 'पागल कुत्तों का मसीहा', 'सोया हुआ जल' (लघु उपन्यास); 'लड़ाई', 'अँधेरे पर अँधेरा' (कहानी); 'बकरी' (नाटक); 'बतूता का जूता', 'महँगू की टाई', 'बिल्ली के बच्चे' (बाल कविता); 'कुछ रंग, कुछ गंध' (यात्रा-संस्मरण) 'शमशेर', 'नेपाली कविताएँ', 'अँधेरा का हिसाब' आदि (सम्पादन) ।

    आपकी रचनाएँ भारतीय भाषाओँ के अलावा रूसी, जर्मन, पोलिश, चेक आदि भाषाओँ में अनूदित ।

    ‘खूंटियों पर टँगे लोग’ के लिए 1983 के 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित किए गए ।

    24 सितम्बर, 1983 को नई दिल्ली में निधन ।

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