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Kavitayen : Vol.-2

Kavitayen : Vol.-2

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  • Pages: 166p
  • Year: 2002
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126704535
  •  
    नयी कविता की लोक–सम्पृक्ति के प्रतिनिधि कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कुआनो नदी और जंगल का दर्द से पूर्ववर्ती सम्पूर्ण काव्य–साधना का पहला खण्ड कविताएँ–1 कविताओं का यह दूसरा खण्ड है । इसमें, पूर्व प्रकाशित, कवि के दो संग्रहों (एक सूनी नाव और गर्म हवाएँ) की कविताएँ सम्मिलित हैं । इन कविताओं में कवि के निजी जीवन और समसामयिक सामाजिक, राजनीतिक जीवन की त्रासदी परस्पर गुम्फित है । ये कविताएँ राजनीति से भागती नहीं क्योंकि वह आज के जीवन का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक मतवाद से उनका अलगाव अवश्य है । दरअसल, सर्वेश्वर के तर्इं इनसान से बड़ा कुछ भी नहीं हैµन ईश्वर, न प्रकृतिµ सबका क’द उनके यहाँ एक है । सर्वेश्वर की कविताएँ भाषा से दुर्व्यवहार करनेवाले कवियों की इधर बढ़ती हुई भीड़ के लिए एक सबक भी है । वे अपनी निजी दुनिया में ले जाकर, सामाजिक ‘सच्चाई’ से सूक्ष्म सम्पर्क करती हुर्इं, पाठक के मन में भाषा के प्रति एक धड़कता हुआ रिश्ता बनाती हैं । एक सूनी नाव और गर्म हवाएँµये शीर्षक ही सर्वेश्वर की काव्य–यात्रा के बदलाव को सूचित करते हैं । पर सर्वेश्वर की कविता में जो ‘गुस्सा’ धीरे–धीरे अपेक्षाकृत अधिक मुखर हुआ है, उसके पीछे भाषा पर पड़ने वाले दबाव की स्थिति से एक गहरा रचनात्मक मुकाबला है । कविता में निषेधी भाषा की तीव्र उपस्थिति कुछ करने और बदलने की इच्छा से अनुप्रेरित है % सिर्फ गुस्से से ही नहीं ।

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    Sarveshwardayal Saxena

    जन्म: 15 सितम्बर, 1927, बस्ती (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एंग्लो संस्कृत हाईस्कूल बस्ती, क्वींस कॉलेज, वाराणसी तथा प्रयाग विश्वविद्यालय।

    जीविकोपार्जन के लिए मास्टर, क्लर्क, आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर, ‘दिनमान’ में प्रमुख उप-सम्पादक और फिर कुछ दिनों ‘पराग’ के सम्पादक। ‘तीसरा सप्तक’ के कवि और नई कविता के अधिष्ठाता शीर्षस्थ कवियों में एक। ‘खूंटियों पर टँगे लोग’ कविता-संग्रह के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार।

    प्रकाशित पुस्तकें: काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ (बाद में ये चारों कविता-संग्रह क्रमशः ‘कविताएँ: एक’ और ‘कविताएँ: दो’ में संकलित प्रकाशित), कुआनो नदी, जंगल का दर्द, खूँटियों पर टँगे लोग, कोई मेरे साथ चले (कविता-संग्रह); उड़े हुए रंग (उपन्यास); सोया हुआ जल, पागल कुत्तों का मसीहा (लघु उपन्यास); लड़ाई, अँधेरे पर अँधेरा (कहानी-संग्रह); बकरी (नाटक); भों-भों-खों-खों, लाख की नाक, कल भात आएगा (बाल-नाटक); बतूता का जूता, महँगू की टाई, बिल्ली के बच्चे (बाल कविता-संग्रह); कुछ रंग, कुछ गंध (यात्रा-संस्मरण)।

    सम्पादित: शमशेर, नेपाली कविताएँ।

    निधन : 24 सितम्बर, 1983

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