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Khatam Nahin Hote Baat

Khatam Nahin Hote Baat

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  • Pages: 128p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126718849
  •  
    जीने का सहजबोध और उसको सहारती–सँभालती दुधमुँही कोंपलों–सी कुछ यादें, कुछ कचोटें, कुछ लालसाएँ और कुछ शिकायतें । बोधिसत्व की ये कविताएँ समष्टि–मानस की इन्हीं साझी जमीनों से शुरू होती हैं, और बहुत शोर न मचाते हुए, बेकली का एक मासूम–सा बीज हमारे भीतर अँकुराने के लिए छोड़ जाती हैं । इन कविताओं की हरकतों से जो दुनिया बनती है, वह समाज के उस छोटे आदमी की दुनिया है जिसके बारे में ये पंक्तियाँ हैं % ‘‘माफी माँगने पर भी/माफ नहीं कर पाता हूँ/छोटे–छोटे दुखों से/उबर नहीं पाता हूँ/पावभर दू/ा बिगड़ने पर/कई दिन फटा रहता है मन/कमीज पर नन्ही–सी खरोंच/देह के घाव से ज्यादा देती है दुख ।’’ (छोटा आदमी) छोटे आदमी की यह दुनिया जिस पर आज किस्म–किस्म की बड़ी चीजें और दुनियाएँ निशाना साध रही हैं, अगर सुरक्षित है, और रहेगी, तो उन्हीं कुछ छोटी चीजों के सहारे जिन्हें बोधिसत्व की ये कविताएँ रेखांकित कर रही हैं । मसलन साथ पढ़ी मुहल्ले की उन लड़कियों की याद जिनके बारे में अब कोई खबर नहीं (हाल–चाल)य गाँव के वे बेनाम–बेचेहरा लोग जिनके सुरक्षित साये में बचपन बीता, और आज महानगर की भूल–भुलैया में जिनकी फिर से जरूरत है (मैं खो गया हूँ)य अपने घावों में सबको पनाह देनेवाली उस आवारा लड़की का प्यार जिसके अपने पास कोई जगह कहीं नहीं (कोई जगह) । और ऐसी ही अन्य तमाम चीजें जो हम साधारण जनों के संसार को हरा–भरा रखती हैं, इन कविताओं के माध्यम से हम तक पहुँच रही हैं । ‘लालच’ शीर्षक कविता में व्यक्त इस छोटे आदमी की नग्न लालसा हिन्दी कविता को एक नया प्रस्थान बिन्दु देती प्रतीत होती है । लग रहा है कि थोड़ी हिचक के साथ ही, लेकिन अब वह उन सुखों में अपनी भी हिस्सेदारी चाहता है, जिनका उपभोग बाकी पूरा समाज इतने निर्लज्ज अ/िाकारबोध के साथ कर रहा है । ‘खत्म नहीं होती बात’ के रूप में कविता–प्रेमियों के सम्मुख यह ऐसी कविता–पुस्तक है जो काव्य–प्रयोगों के लिए नहीं अपने भाव–सातत्य और वैचारिक नैरंतर्य के लिए महत्त्वपूर्ण है ।

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    Bodhisatva

    मूलनाम- अखिलेश कुमार मिश्र

    जन्म- 11 दिसम्बर 1968 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुरियावाँ थाने के एक गाँव भिखारी रामपुर में जन्म। पितामह पंडित राम नरेश मिश्र वैद्य थे और पिता पंडित हीरा राम मिश्र उत्तर प्रदेश सरकार के नौकर थे। माँ राम सवांरी देवी धर्मपरायण महिला है।

    शिक्षा- प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की ही पाठशाला से। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. और वहीं से तार सप्तक के कवियों के काव्य सिद्धान्त पर पी.एच.डी की उपाधि ली। यूजीसी के रिसर्च फैलो रहा।

    प्रकाशन- सिर्फ कवि नहीं (1991), हम जो नदियों का संगम हैं (2000), दुख तंत्र (2004), खत्म नहीं होती बात (2010) ये चार कविता संग्रह प्रकाशित हैं। तारसप्तक-काव्य सिद्धान्त और कविता नामक शोध प्रबन्ध (2011) लम्बी कहानी वृषोत्सर्ग (2005) छपी

    संपादन- गुरवै नमः (2002), भारत में अपहरण का इतिहास (2005), रचना समय के शमशेर जन्म शती अंक का संपादन (2010)।

    प्रकाशनाधीन- कविता की छाया में (लेख, समीक्षा और व्याख्या)

    अन्य लेखन- शिखर (2005), धर्म (2006) जैसी फिल्मों और दर्जनों टीवी धारावाहिकों का लेखन

     

    सम्मान- कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल सम्मान, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, संस्कृति अवार्ड, हेमंत स्मृति सम्मान प्राप्त है।

    अन्य- कुछ कविताएँ देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित हैं। कुछ कविताएँ मास्को विश्वविद्यालय के स्नातक के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती है। दो कविताएँ गोवा विश्व विद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल थीं।

    फिलहाल- पिछले 10 साल से मुम्बई में बसेरा है। सिनेमा, टेलीविजन और पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखाई का काम।

     घर का पता- श्री गणेश को.हा.सो., स्वातन्त्रय वीर सावरकर मार्ग, सेक्टर नं. 3, प्लाट नं. 233 प्लैट नं. 3, चारकोप, कांदीवली (पश्चिम) मुम्बई-400067। मोबाइल-0-9820212573

    ईमेल पता abodham@gmail.com

    ब्लाॅग का पता http://vinay-patrika.blogspot.com

     

     

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