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Khoontiyon Per Tange Log

Khoontiyon Per Tange Log

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  • Pages: 136
  • Year: 2018, 6th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171789382
  •  
    खूँटियों पर टंगे लोग स्व. सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का सातवाँ काव्य-संग्रह है, जिसमें शामिल अधिकतर कविताएँ 1976-1981 के बीच लिखी गई हैं | इन कविताओं में नियति और स्थिति को स्वीकार कर लेने की व्यापक पीड़ा है | यह पीड़ा कवि के आत्म से शुरू होकर समाज तक जाती है और फिर समाज से कवि के आत्म तक आती है और इस तरह कवि और समाज को पृथक न कर, एक करती हुई उसके काव्य-व्यक्तित्व को विराट कर जाती है | सम्प्रेषण की सहजता सर्वेश्वर की कविताओं का मुख्य गुण रहा है और इसकी कलात्मक साध इस संग्रह में और निखरी है | एक समर्थ कवि के स्पर्श से चीजें वह नहीं रह जातीं जो हैं-कोट, दस्ताने, स्वेटर सब-के-सब युग की चुनौतियों से टकराकर क्रांति, विद्रोह और विरोध से जुड़ जाते हैं | प्रतीकों और बिम्बों का ऐसा सहज इस्तेमाल दुर्लभ है | सर्वेश्वर का काव्य-संसार बहुत व्यापक है | इतना व्यापक संवेदन-क्षेत्र वह रचते हैं कि उनके एक कवि में अनेक कवि देखे जा सकते हैं और सभी सर्वेश्वर हैं | उनकी काव्य-भाषा लोक से आकर इस तरह सम्भ्रांत भाषा में मिल जाती है कि एक का खुरदरापन और दूसरे का चिकनापन अलग-अलग पहचान पाना कठिन हो जाता हैं | वस्तुतः खूँटियों पर टंगे लोग की कविताएँ सर्वेश्वर की काव्य-भाषा को और आगे बढाती हैं तथा समकालीन हिंदी काव्य को भी, जिसका चरित्र मूल्यों के अभाव और व्यवस्था के दबाव में तेजी से बदल रहा है | यह बदलाव, बिना किसी अतिरिक्त आग्रह के, सर्वेश्वर के इस संग्रह में आसानी से देखा जा सकता है |

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    Sarveshwardayal Saxena

    जन्म: 15 सितम्बर, 1927, बस्ती (उ.प्र.)।

    शिक्षा: एंग्लो संस्कृत हाईस्कूल बस्ती, क्वींस कॉलेज, वाराणसी तथा प्रयाग विश्वविद्यालय।

    जीविकोपार्जन के लिए मास्टर, क्लर्क, आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर, ‘दिनमान’ में प्रमुख उप-सम्पादक और फिर कुछ दिनों ‘पराग’ के सम्पादक। ‘तीसरा सप्तक’ के कवि और नई कविता के अधिष्ठाता शीर्षस्थ कवियों में एक। ‘खूंटियों पर टँगे लोग’ कविता-संग्रह के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार।

    प्रकाशित पुस्तकें: काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ (बाद में ये चारों कविता-संग्रह क्रमशः ‘कविताएँ: एक’ और ‘कविताएँ: दो’ में संकलित प्रकाशित), कुआनो नदी, जंगल का दर्द, खूँटियों पर टँगे लोग, कोई मेरे साथ चले (कविता-संग्रह); उड़े हुए रंग (उपन्यास); सोया हुआ जल, पागल कुत्तों का मसीहा (लघु उपन्यास); लड़ाई, अँधेरे पर अँधेरा (कहानी-संग्रह); बकरी (नाटक); भों-भों-खों-खों, लाख की नाक, कल भात आएगा (बाल-नाटक); बतूता का जूता, महँगू की टाई, बिल्ली के बच्चे (बाल कविता-संग्रह); कुछ रंग, कुछ गंध (यात्रा-संस्मरण)।

    सम्पादित: शमशेर, नेपाली कविताएँ।

    निधन : 24 सितम्बर, 1983

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