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Kuchh Kahaniyan : Kuchh Vichar

Kuchh Kahaniyan : Kuchh Vichar

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  • Pages: 154p
  • Year: 1998
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728565
  •  
    रचना और पाठक के बीच समीक्षक या आलोचक नाम की तीसरी श्रेणी जरूरी है या नहीं, यह शंका पुराणी है ! सामाजिक या राजनितिक जरूरत के रूप में यह श्रेणी अपनी उपादेयता बार-बार प्रमाणित करती रही है ! लेकिन साहित्यिक जरूरत के रूप में ? यह ख़ास जरूरत दरअसल न हमेशा पेश आती है और न पूरी होती है ! यह जरूरत तो बनानी पड़ती है ! आलोचना या समीक्षा की विरली ही कोशिशें ऐसी होती हैं जो पाठक को रचना के और-और करीब ले जाती हैं, और-और उसे उसके रस में पगाती हैं ! ये कोशिशें रचना के सामानांतर खुद में एक रचना होती हैं ! मूल के साथ एक ऐसा रचनात्मक युग्म उनका बंटा है कि जब भी याद आती हैं, दोनों साथ ही याद आती हैं ! इस पुस्तक में संकलित समीक्षाएँ ऐसी ही हैं ! बडबोलेपन के इस जमाने में विश्वनाथ त्रिपाठी ने एक अपवाद की तरह हमेशा 'अंडरस्टेटमेंट' का लहजा अपनाया है ! उनके लिखे पर ज्यादा कहना भी अनुचित के सिवाय और कुछ नहीं है ! इतना कहना लिकिन जरूरी लगता है कि कुछ स्वातंत्रयोत्तर हिंदी कहानियों पर लिखी ये समीक्षाएँ पढने के बाद वे कहानियां फिर-फिर पढने को जी करता है ! हमारे लिए वे वही नहीं रह जातीं, जो पहले थीं !

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    Vishwanath Tripathi

    विश्वनाथ त्रिपाठी

    जन्म: 16 फरवरी, 1931, जिला बस्ती (अब सिद्धार्थनगर) के बिस्कोहर गाँव में।

    पिता: श्री तेज बहादुर तिवारी।

    माता: श्रीमती सिरताजी देवी।

    13 जुलाई, 1956 को श्रीमती माहेश्वरी त्रिपाठी से विवाह।

    शिक्षा: पहले गाँव में, फिर बलरामपुर कस्बे में, उच्च शिक्षा कानपुर और वाराणसी में। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से पी-एच.डी.।

    कृतियाँ: प्रारम्भिक अवधी, हिन्दी आलोचना, हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास, लोकवादी तुलसीदास, मीरा का काव्य, देश के इस दौर में (परसाई केन्द्रित), कुछ कहानियाँ: कुछ विचार, पेड़ का हाथ (केदारनाथ अग्रवाल केन्द्रित), जैसा कह सका (कविता संकलन), नंगातलाई का गाँव (स्मृति-आख्यान), व्योमकेश दरवेश (आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का पुण्य स्मरण)।

    सम्पादन: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के साथ अद्दहमाण (अब्दुल रहमान) के अपभ्रंश काव्य ‘संदेश रासक’ का सम्पादन, कविताएँ 1963, कविताएँ 1964, कविताएँ 1965 (तीनों अजित कुमार के साथ), हिन्दी के प्रहरी: रामविलास शर्मा (अरुण प्रकाश के साथ)।

    सम्मान: गोकुलचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान।

    सम्पर्क: बी.-5, एफ-2, दिलशाद गार्डन, दिल्ली-45

    फोन: 011-22581418

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