• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Kyonki Ek Samay Shabd Hai

Kyonki Ek Samay Shabd Hai

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 700

Special Price Rs. 630

10%

  • Pages: 632p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9788180311710
  •  
    इस पुस्तक में लेखक का यह प्रयास रहा है कि ज्ञान के साहित्यशास्त्र में ज्ञान का समाजशास्त्र भी सार्थक ढंग से जुड़े। इसके लिए साहित्य के साथ समय और समाज के घटक भी संश्लिष्ट होते चले गये हैं। इस पुस्तक में एक अनवरत आत्मविकास और सामाजिक प्रबोध का सचेतन संयोग स्वतः होता गया है। इसीलिए इसमें प्रश्नों के हाशिये और संदर्भ, दोनों ही बदले हैं और परिवर्द्धित हुए हैं। आधुनिकताबोध से चर्चा की शुरुआत हुई है और कलासूत्रों के समाजशास्त्र तथा इनसान की विमुक्ति के प्रश्नों से जोड़ा भी गया है; यदि अत्याधुनिक कहानी की जटिलता को समझा गया है तो उसमें अनिवार्यताबोध की धारणा का उन्मेष प्राप्त हो गया है; यदि ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ और ‘मृगनयनी’ जैसे उपन्यासों के ऐतिहासिक कलारूपों का निर्धारण किया गया है तो उन्हें इतिहासदर्शन तथा गाथा-रोमांसों के अत्याधुनिक फलकों पर रखकर नये प्रासंगिक पारिभाषिक अर्थ हासिल किये गये हैं; ‘झूठा-सच’, ‘बलचनमा’ या ‘धरती धन न अपना’ जैसे उपन्यासों की भी पुराने चौखटों से बाहर निकलकर समकालीन जीवन के स्वरूपों तथा समाज के सुपरिगठन के संदर्भों से तुलना की गई है। इस तरह साहित्य को सामूहिक समकालीन जीवन में हस्तक्षेप करनेवाले अभिकर्त्ता की असली भूमिका देकर उसे परखा गया है। इस परख और पहचान में शास्त्रीय शब्दावली झटके से विलुप्त होती चली गई है; मानो बहुत-सी लीकें पँुछ गई हैं। कविता के खंड में जहाँ प्रसाद के जीवन- दर्शन की झाँकी पाने का प्रयास किया गया है, वहीं निराला के वेदांती तथा दार्शनिक शब्द-संसार के जीवनीमूलक तात्पर्य तथा आधुनिक अर्थ ढँूढ़े गए हैं। इस ईमानदार खोज और पहचान का अनिवार्य नतीज़ा यही निकला है कि कई महाप्रश्न उठ आए हैं जो साहित्य, सर्जना और आलोचना के त्रिकोण से बाँधे नहीं जा सके। उनके आयत्तीकरण के लिए एक संश्लिष्ट समाजदर्शन और एक समग्र सांस्कृतिक रूप पेश किये गए हैं। इस तरह इस पुस्तक की एक खुली हुई सार्वजनीन सृजन-प्रक्रिया है जो उन कई सही और सच्चे सवालों को उठाती है जिनके उत्तर पाने के लिए पंडिताउ$ तथा प्रोफेसरी आलोचना-रूढ़ियों का क्षय हो जाता है। साहित्य का शब्द-संसार, कृती का अनुभव- संसार तथा समाज का घटना-संसार - ये तीनों समन्वित होकर इस पुस्तक में सही आलोचना का समाहार करते हैं, यह कहना ज्यादा समीचीन होगा। विद्वान आलोचक और साहित्य-मर्मज्ञ रमेश कुंतल मेघ की यह कृति निश्चय ही हिन्दी आलोचना की एक उपलब्धि है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Ramesh Kuntal Megh

    पचहत्तर-पार।

    स्वदेश के लगभग सोलह शहरों के वसनीक यायावर तथा विदेश के पाँच देशों (यूगोस्लाविया, इटली, सोवियत रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका) के यात्रिक।

    जाति-धर्म-प्रांत-सांप्रदायिकता से निरपेक्ष।

    संस्कारत : चित्रकार; फिर विज्ञान में बंदरछलाँग लगाई। अंतत: मार्क्सीय-सांस्कृतिक पैरामीटर पर आलोचिंतना, सौंदर्यबोधाशास्त्र, देहभाषा मिथक आलेखकारी के चतुरंग के शिल्पी-भोक्ता-रसिक-द्रष्टा।

    शिक्षा : बी.एस-सी.; एम.ए.; पी-एच.डी.।

    दीक्षा : बी.एन.एस.डी. कॉलेज, कानपुर, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी।

    अध्यापन : महाराजा कॉलेज आरा (बिहार); पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़; पंजाब यूनिवर्सिटी रीजनल सेंटर दोआबा कॉलेज, जालंधर; रीजनल सेंटर, एस.डी. कॉलेज, अंबाला कैंट; गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर; यूनिवर्सिटी ऑफ आर कंसास एट, पाईन ब्लफ, यू.एस.ए.।

    वर्तमान स्थायी ठाँव : फ्लैट सं. 3 (भू-तल) स्वास्तिक विहार, फेज-ढ्ढढ्ढढ्ढ मनसा देवी कॉम्प्लेक्स, पंचकूला-134109 (हरियाणा)।

    दूरभाष : 0172-2557312

    चलभाष : 097807-74224

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144