• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Lout Aa, Aao Dhar

Lout Aa, Aao Dhar

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 159p
  • Year: 1997
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 8171192428
  •  
    पन्त अपने को आश्वस्त करते हुए भी आश्वस्त नहीं होते । अकेलेपन से डरते हैं । दु :ख से भागते हैं । नर्वस, होते हैं 1 शरीर और आत्मा के क्षय से उन्हें डर लगता है । भीतर से अपनी वाणी के प्रति ही अविश्वास है । और जैसे-जैसे यह अविश्वास बढ़ता जाता है, कविता में वे 'लाउड ' होते जाते हैं । वे कभी आगे, कभी पीछे, दांयें-बायें चक्कर काटते हैं । वे मुक्ति चाहते हैं, अपने भीतर के बंजरपन से । इस प्रयत्न में वे दिन-रात लिखते चले जाते हैं । संग्रह पर संग्रह आते हैं और इजहार करते हैं कि तुम्हारी मुक्ति अब सम्भव नहीं है । शमशेर का जीवन और उनकी कविता -दोनों ही अति ठोस, कटु सत्य से संधानित, अति-साधारण को असाधारण पारलौकिकता तक उठा देने के राग से अनुरंजित हैं । वे कविता में प्रेम और प्रेम में कविता खोजते और साधते हैं । उनके लिए यह एक 'अजपा-जाप' की तरह है । सम्पूर्ण अस्तित्व में घुला, नाभि से उठकर कंठ तक थरथराता हुआ... .निरंतर एक जोगेश्वर भाव। मेरे गुरु (डॉ० धीरेन्द्र वर्मा) के चेहरे पर एक निर्भाव मुक्ति थी-एक ऐसी मुक्ति, जो जीवन भर उन्हें छलती रही, जो उनकी मर्यादा और परिग्रहधर्मिता के विरुद्ध थी । एक ऐसी मुक्ति, जिसकी खोज उन्होंने जीवन के अन्तिम दिनों में अचानक ही की थी। अपने स्वभाव की अन्तिम परिणति में वे एक ऐसे योद्धा सिद्ध हुए, जिनकी शाबाशी या सांत्वना के लिए कहीं, कोई ईश्वर उपस्थित नहीं था। उसकी (ज्ञानरंजन) मनसबदारी पाने के लिए होड़ मची रहती है । अक्सर उसके मनसबदार दुश्मन पार्टी से आते हैं । उनमें जो कमजोर और महत्वाकांक्षी होते हैं उन्हें वह पकड़ लेता है । वह एक ऐसा साँवला, खगोलीय ग्रह है, जिसके गुरुत्वाकर्षण में अनेक छोटे-मोटे ग्रह-नक्षत्र बँधे हुए घूमते रहते हैं । सभी को उससे रोशनी चाहिए, चाहे वह जितनी भी कम, जितनी भी मैली-कुचैली क्यों न हो । इस तरह भूल और धुआँ और चमक और देह और आत्मा की स्थायी अशान्ति में वह अमर है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Doodhnath Singh

    दूधनाथ सिंह

    जन्म : 17 अक्टूबर, 1936, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे-से गाँव सोबंथा में !

    शिक्षा : एम्.ए. (हिंदी साहित्य), इलाहबाद विश्वविद्यालय !

    जीविका : कुछ दिनों (1960-62) तक कलकत्ता में अध्यापन ! फिर इलाहबाद विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग में ! अब सेवानिवृत !

    लेखन : सन 1960 के आसपास से !

    कृतियाँ : आखिरी कलाम, निष्कासन, नमो अन्धकार (उपन्यास); सपाट चहरे वाला आदमी, सुखांत, प्रेमकथा का अंत न कोई, माई का शोकगीत, धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे, तू फू (कहानी-संग्रह); कथा समग्र (सम्पूर्ण कहानियां); यम्गाथा (नाटक); अपनी शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू (कविता-संग्रह); सुरंग से लौटते हुए (लम्बी कविता); निराला : आत्महंता आस्था (निराला की कविताओं पर एक सम्पूर्ण किताब); लौट आ, ओ धर! (संस्मरणात्मक मुक्त गद्य); कहा-सुनी (साक्षात्कार और आलोचना); महादेवी (महादेवी की सम्पूर्ण रचनाओं पर एक किताब) !

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144