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Mahabharat : Ek Navin Rupantaran

Mahabharat : Ek Navin Rupantaran

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  • Pages: 344P
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126723072
  •  
    महाभारत विश्व-इतिहास का प्राचीनतम महाकाव्य है ! होमर की इलियड और ओडीसी से कहीं ज्यादा प्रवीणता के साथ परिकल्पित और शिप्लित यह रचनात्मक कल्पना की अदभुत कृति है ऋषि वेदव्यास द्वारा इसा के प्रायः 2000 वर्ष पूर्व रचित इस महाकाव्य में लगभग समस्त मानवीय मनोभावों-प्रेम और घृणा, क्षमा और प्रतिशोध, सत्य और असत्य, ब्रह्मचर्य और सम्भोग, निष्ठां और विश्वासघात, उदारता और लिप्सा-की सूक्ष्म प्रस्तुति मिलती है ! यों तो महाभारत भारतीय मानस में रचा-बसा ग्रन्थ है पर इसने सम्पूर्ण विश्व के पाठकों को आकर्षित किया है ! शायद इसीलिए इस महाकाव्य का रूपांतर विश्व की सभी प्रमुख भाषाओँ में हुआ है ! परन्तु विस्मय होता है यह देखकर कि ज्यादातर रूपान्तरों में इसकी क्षमता का प्रतिपादन एक काव्यात्मक सौंदर्य और सुगंध से समृद्ध कथा के रूप में नहीं हो पाया है ! संभवतः इसलिए कि लेखकों ने मूलतः इसके कहानी पक्ष को ही प्रधानता दी ! ... किन्तु इस पुस्तक के लेखक शिव के. कुमार ने इसी कारन इस महाकाव्य में कुछ रंग और सुगंध भरने का प्रयास किया है ! यह वस्तुतः महाभारत का एक नवीन रूपांतर है ! महाभारत एक अद्वितीय रचना है ! यह काल और स्थान की सीमाओं से परे है ! इसलिए हर युग में इसके साथ सम्वाद संभव है ! वर्तमान युग में भी सामाजिक न्याय, राजनितिक स्वार्थजनित राष्ट्र विभाजन, नारी सशक्तिकरण और राजनेताओं के आचरण के सन्दर्भों में इसका आर्थिक औचित्य है ! अंग्रेजी से हिंदी में इस कृति का अनुवाद करते हुए प्रभा के. सिंह ने हिंदी भाषा की प्रकृति का विशेष ध्यान रखा है ! समग्रतः एक अनूठी रचना !

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    Shiv K Kumar

    अंग्रेजी के मूर्धन्य रचनाकार व चिन्तक।

    जन्म: लाहौर।

    शिक्षा: लाहौर और इंग्लैंड में। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

    उस्मानिया विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोपे$सर रहे। सेंट्रल गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के वाइस चांसलर पद पर कार्य किया। अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में वर्षों अंग्रेजी का अध्यापन किया।

    प्रकाशन: विश्व के प्रतिष्ठित प्रकाशनों से कविता, उपन्यास, नाटक और अनुवाद की 30 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।

    कविताओं और कहानियों का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रकाशन।

    बी.बी.सी. प्रसारण सेवा से अनेक रचनाएँ प्रसारित।

    आपके रचनात्मक योगदान पर तीन आलोचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित।

    प्रमुख सम्मान: साहित्य अकादेमी पुरस्कार (1986), रॉयल सोसायटी ऑफ लिटरेचर, लन्दन के पे$लो चयनित (1978) एवं पद्मभूषण (2001)।

    सम्पर्क: हब्शी गुड़ा, स्ट्रीट नं. 3, हैदराबाद-500007

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