• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Mahakaushal Anchal Ki Lokkathyen

Mahakaushal Anchal Ki Lokkathyen

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 999

Special Price Rs. 899

10%

  • Pages: 391p
  • Year: 2018, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126715770
  •  
    इस पुस्तक में संकलित महाकोशल अंचल की लोककथाओं को मध्यप्रदेश के मंडला, सिवनी, बालाघाट, बिलासपुर एवं रायपुर जिलों और रीवा, कवर्धा, सारंगढ़ और बस्तर से एकत्र किया गया है । इन कहानियों को स्थानीय जनजातियों के लोगों से सुनकर और बातचीत कर यहाँ लिपिबद्ध किया गया है । मध्यवर्ती भारत में प्रचलित कहानियों के अनेक रूप हैं । इनमें से कुछ को हम गद्य कह सकते हैंµसीधे–सीधे विवरण जिन्हें संकेतों और भंगिमाओं के माध्यम से सुनाया गया, फिर भी उनमें कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया । कुछ कहानियों में संवादों के अंशों को गाकर बताया गया था । सूक्तियाँ या पद्य लयबद्व सरल धुनों में गाई गई थीं । किसी–किसी कहानी में सभी संवाद संगीत में नहीं थेे । कुछ विशेष पद्य और भाव ही संगीत में थे । यह जानना दिलचस्प होगा कि कहानी का गाया हुआ अंश कहानी के साथ जुड़ा ही रहा जिससे इन कहानियों की आत्मीयता बनी रही । प्रस्तुत पुस्तक आदिवासियों की कहानियों के जरिए हमें उनके नजदीक ले जाती है । आदिवासियों के विभिन्न संस्कारों के साथ–साथ उनकी मासूमियत और भोलापन भी हमें इन कहानियों में देखने को मिलता है । इसके अलावा इस पुस्तक को आनन्द के उद्देश्य से पढ़ा जाये तो यह और मनोरंजक तथा सरस लगेगी ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Veriar Elwin

    VeriarElwin

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna

    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144