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Mahamanav Mahapandit

Mahamanav Mahapandit

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  • Pages: 136
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788171192168
  •  
    'महामानव महापण्डित’ शीर्षक यह कृति भारतीय साहित्य के अप्रतिम क्रान्तिधर्मी रचनाकार राहुल सांकृत्यायन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित है। लेकिन इसका महत्त्व सिर्फ यही नहीं है, बल्कि यह भी है कि राहुल-व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को उनकी ही अन्तरंग आँखों ने देखा और लेखा है। जाहिर है, कमला सांकृत्यायन की कलम से लिखे गए ये संस्मरणात्मक और मूल्यांकनपरक लेख एक गहरी आत्मीयता से तो आप्लावित हैं ही, अपनी पारदर्शिता में भी विशिष्ट हैं। आकस्मिक नहीं कि पुस्तक के नाम में पहले 'महामानव’ शब्द है और फिर 'महापण्डित’। पुस्तक में कुल पन्द्रह लेख हैं। इनमें से कुछ तो राहुल जी के लेखकीय, बौद्धिक कर्म का विवेचन करते हैं और कुछ उनके स्वभाव, पारिवारिक जीवनचर्या एवं रुचियों आदि को उजागर करते हैं। ऐसा करते हुए इन लेखों में जो श्रद्धाभाव है, उसके साथ एक प्रकार की नि:संगता भी है, जिससे यह कृति अनावश्यक भावुकता से मुक्त रह सकी है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इस पुस्तक से गुजरते हुए पाठकगण राहुल जी को अपने बहुत निकट महसूस कर सकेंगे। मुझे 1950 की बात याद आ रही है जब हम गर्मियों में चार महीने के लिए नैनीताल में थे। महापंडितजी 'आदि हिंदी की कहानियाँ और गीतÓ लिख रहे थे। हमारे पड़ोस में ही मेरठ तहसील की रहनेवाली वृद्धा महिला रामनमाई रहती थीं। उनसे कौरवी बोली में कहानियाँ और गीत सुन-सुन कर पंडितजी नोट करते जाते और बाद में मुझसे टाइप करवाते। कहानियों का हिस्सा समाप्त हो जाने पर कौरवी लोकगीतों की बारी आई। रामनमाई को यूँ गीत याद नहीं आते थे, पर जब वे लय में गातीं तब शब्द अपने आप निकल आते थे। जब पंडितजी नोट ले रहे होते तब मैं भी उनके पास बैठकर गीतों को सुना करती। एक बार सुनकर फिर मैं भी दुहरा देती थी। इससे पंडितजी बड़े प्रसन्न हुए और मुझ पर दोहरा भार डाल दिया—एक तो टाइप करना और दूसरा गीतों को गाकर सुना भी देना। लेकिन तब इन्कार करने का दुस्साहस मैं नहीं करती थी। —इसी पुस्तक से

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    Kamla Sanskrityayan

    कमला सांकृत्यायन

    जन्म : 15 अगस्त, 1920, कलिम्पोंग, जिला  दार्जिलिंग में। मातृभाषा : नेपाली।

    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी., साहित्य-रत्न।

    नेपाली और हिंदी में निरंतर लेखन। हिन्दी-नेपाली तथा नेपाली-हिंदी में अनुवाद-कार्य भी।

    साहित्य अकादमी की नेपाली सलाहकार समिति में रहीं। नेपाली अकादमी, पं. बंगाल सरकार से पुरस्कृत-सम्मानित।

    प्रकाशित कृतियाँ

    हिंदी में : प्रतिवेशी नेपाली साहित्य, असम की लोककथाएँ, महामानव पंडित। नेपाली में : विचार तथा विवेचना, बौद्ध धर्म एवं दर्शन। नेपाली में अनुवाद : राजस्थानी साहित्य का इतिहास, लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ, राहुल सांकृत्यायन, तिब्बत में बौद्ध धर्म।

    नेशनल बिब्लियोग्राफी ऑफ  इंडियन लिट्रेचर (खंड-5) में नेपाली कहानियों का हिंदी अनुवाद।

    लोरेटो कॉलेज, दार्जिलिंग में रीडर एवं हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में सेवा-निवृत्त।

    निधन : 25 अक्टूबर, 2009

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