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Main Borishailla

Main Borishailla

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  • Pages: 400p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126712052
  •  
    महुआ माजी का पहला उपन्यास - ‘मैं बोरिशाइल्ला’ हिन्दी उपन्यासों की दुनिया में अपने पदार्पण के बाद से ही कथानक के अनूठेपन के कारण चर्चित रहा है। उपन्यास की पृष्ठभूमि में अविभाजित भारत के पूर्वी बंगाल, ख़ासकर बोरिशाल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है। महुआ माजी के पूर्वज बोरिशाल से ही आकर भारत के विभिन्न हिस्सों में बसे थे इसलिए बोरिशाल से उनका भावनात्मक लगाव है। उपन्यास बोरिशाल के एक पात्र से शुरू हुआ है और बांग्लादेश का निर्माण उसका उत्कर्ष है। ‘मैं बोरिशाइल्ला’ में राष्ट्र-राज्य बनाम साम्प्रदायिक राष्ट्र की बहस दिलचस्प ढंग से चलती है और बांग्लादेश की ‘मुक्ति-कथा’ का स्वरूप भाषायी राष्ट्रवाद में तब्दील होकर पाठकों को चमत्कृत कर देता है। मुक्ति-संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों तथा उर्दू भाषी नागरिकों द्वारा बांग्लाभाषियों पर किए गए अत्याचारों तथा उसके ज़बरदस्त प्रतिरोध का बहुत प्रामाणिक चित्रण हुआ है। इस उपन्यास का अर्थ ज़मीन से जुड़ी कथा-भाषा और स्थानीय प्रकृति में किस तरह ढक जाता है इसका अन्दाज़ ही नहीं लगता। यह उपन्यास घटनाओं के जीवन्त चित्रण की विलक्षण शैली के कारण बेहद रोचक और पठनीय है। समय तथा समाज की तमाम विसंगतियों को अपने में समेटे एक बहुआयामी उपन्यास है - ‘मैं बोरिशाइल्ला। इसमें प्रेम की अन्तःसलिला भी बहती है और एक राष्ट्र के टूटने और बनने की कथा भी!

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    Mahua Maji

    जन्म : 10 दिसम्बर। शिक्षा : समाजशास्त्र में एम.ए., पी-एच.डी., यू.जी.सी. नेट। फिल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट, पुणे से फिल्म ऐप्रिसिएशन कोर्स। फाइन आर्ट्स में 'अंकन विभाकर’ (रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल)।

    हंस, नया ज्ञानोदय, कथादेश, कथाक्रम, वागर्थ आदि पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित।

    अंग्रेजी, बांग्ला, पंजाबी सहित कई भाषाओं में कहानियाँ अनूदित।

    पहले उपन्यास 'मैं बोरिशाइल्ला’ का पहला संस्करण 2006 में राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित। इसका अंग्रेजी अनुवाद 'मी बोरिशाइल्ला’ 2008 में रूपा ऐंड कम्पनी, नई दिल्ली से प्रकाशित हुआ जिसे वर्ष 2010 में रोम, इटली स्थित यूरोप के सबसे बड़े विश्वविद्यालय 'सापिएन्जा युनिवर्सिटी ऑफ रोम’ में मॉडर्न लिट्रेचर के बी.ए. के कोर्स में शामिल किया गया। यह उपन्यास राजकमल प्रकाशन की 60वीं वर्षगाँठ के अवसर पर घोषित 60 वर्षों में प्रकाशित हिन्दी के ऐसे 30 शिखर उपन्यासों में भी शामिल है, जिन्हें मील का पत्थर कहा गया। इंटरनेट से जारी राजकमल प्रकाशन की बेस्टसेलर पुस्तकों में भी शामिल।

    दूसरा उपन्यास 'मरंग गोड़ा नीलकंठ हुआ’ 2012 में राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित।

    दिल्ली, मुम्बई, जम्मू, शिमला, कोचीन, मेरठ, गोरखपुर, हैदराबाद, बंगलुरू, केरल, इलाहाबाद, सोलापुर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बीकानेर, राजकोट, जे.एन.यू., पटियाला, सौराष्ट्र आदि विभिन्न विश्वविद्यालयों में महुआ माजी के उपन्यासों पर शोधकार्य हो रहे हैं।

    सम्मान/पुरस्कार : वर्ष 2007 में लन्दन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में ब्रिटेन के आन्तरिक सुरक्षा मंत्री के हाथों 'अन्तर्राष्ट्रीय कथा यू.के. सम्मान’। वर्ष 2010 में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी तथा संस्कृति परिषद् द्वारा 'अखिल भारतीय वीर सिंह देव सम्मान’। वर्ष 2010 में उज्जैन की कालिदास अकादमी में 'विश्व हिन्दी सेवा सम्मान’। लोक सेवा समिति, झारखंड द्वारा 'झारखंड रत्न सम्मान’, 'झारखंड सरकार का राजभाषा सम्मान’। वर्ष 2012 में राजकमल प्रकाशन कृति सम्मान : 'मैला आँचल-फणीश्वरनाथ रेणु पुरस्कार’।

    सम्प्रति : झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष।

    सम्पर्क : 18-सी, राधा गोविन्द स्ट्रीट, थड़पकना, रांची-834001, झारखंड।

    फोन : 09835193111,  09431577481

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