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Mangla Se Shayan Tak

Mangla Se Shayan Tak

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  • Pages: 223
  • Year: 2018, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Lokbharti Prakashan
  • ISBN 13: 9789388211291
  •  
    'मैं इंसानियत में बसता हूँ / लोग मुझे मजहबों में ढूढ़ते है ||’ जिन्दगी को आसान कर देने वाला ये फलसफा ही 'मंगला से शयन तक’ का मुख्य आधार है जिसे डॉ. अचला नागर ने इतने रोचक अन्दरिब में कह दिया कि उपन्यास कहीं भी बोझिल नहीं हो पाता । इस उपन्यास में वर्तमान और देश के विभाजन उपरान्त के तो ट्रैक एक साथ कहानियाँ सुना रहे हैं । वर्तमान में शहर के जाने माने और लोकप्रिय गायक-संगीतकार उस्ताद रमजान अली खान जिन्हें सभी प्यार से नन्हें भाई कहते हैं, जो खुद को मजहबे इन्सानियत का नुमाइन्दा बतलाते हैं क्योंकि उन्हें जन्म दिया एक मुसलमान माँ ने, अपना दूध पिला के जिन्दा रखा एक सिख महिला प्रकाश कौर ने, और पाल-पोस कर संगीत के इस मुकाम तक पहुँचाया हिन्दू महिला पद्ममश्री तारा शर्मा ने जो हालात की भंवर में डूबते उतराते एक ख्यातिप्राप्त गायिका बन गयी थी । नन्हें रोज़ की तरह प्रात: पाँच बजे तैयार हो के मंगला आरती के लिए हाथ में टॉर्च लिये सड़क पर निकल आये । दो घर छोड़ के ही पण्डित विष्णुराम का घर था। यहाँ पहुंचते ही तो श्रीराम क्रो पुकारते, और फिर दोनों मित्र साथ-साथ आगे बढ़ते । आज एकाएक ही नन्हें कहने लगे, ‘सच कहूँ तो ईश्वर और अल्लाह, मन्दिर और मस्जिद, पूजा और इबादत में फर्क ही क्या है । अब देख सुबह से लेकर रात तक पाँच नमाजें पढ़ी जाती है, ऐसे ही ‘मंगला से शयन तक' पाँच आरतियाँ की जाती हैं। कुल मिला के मतलब तो ईश्वर और अल्लाह को याद करना ही हुआ न? ‘श्रीराम चलते-चलते ठिठक गया, नन्हें का मुँह देखते बोला, ‘क्या लाख रुपये की बात तुने की है, वाह... काश हर कोई इस बात को समझ सके।‘ और बातें करते हुए दोनों मन्दिर पहुँच ही गये ।

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    Dr. Achala Nagar

    डॉ. अचला नागर

    जन्म : 2 दिसम्बर, लखनऊ (उ.प्र.)

    शिक्षा : बी.एस-सी., एम.ए., पी-एच.डी. (हिन्दी साहित्य)

    साहित्य : 'निहारिका', 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' , ‘धर्मयुग’, 'सारिका' , 'कादम्बिनी' आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित । दो कहानी-संग्रह 'नायक-खलनायक’ एवं ‘बोल मेरी मछली’, ‘कथा-सागर की मछलियाँ' , संस्मरणात्मक पुस्तक ‘अमृतलाल नागर की बाबूजी बेटाजी एण्ड कम्पनी' , उपन्यास 'छल' एवं रंगमंच नाटक 'बाइस्कोप वाला चितचोर' ।

    फिल्म-धारावाहिक : विगत 35 वर्षों से फिल्मोद्योग में कथा, पटकथा एवं संवाद लेखिका के रूप में ख्यातिपूर्वक

    प्रतिष्ठित । प्रमुख फिल्में 'निकाह', ‘आखिर क्यों’, 'ईश्वर', 'नगीना', 'बागबान’, ‘बाबुल’ लगभग पच्चीस अन्य । विभिन्न धारावाहिकों के लगभग चार हजार एपिसोड ।

    साहित्य-सम्मान : हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा यशपाल अनुशंसा पुरस्कार-1987; हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा ‘साहित्य भूषण पुरस्कार 2003'; ब्रज कला केन्द्र द्वारा ‘ब्रज विभूति सम्मान 2006'; 'उत्तराधिकार अमृत्तलाल नागर' दुष्यन्त कुमार पाण्डुलिपि संग्रहालय भोपाल 2007'; ‘सारस्वत सम्मान आशीर्वाद 2 0 0 9 '; हिन्दी उर्दू साहित्य अवार्ड कमेटी उत्तर प्रदेश द्वारा ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान 2009'; पं. अमृतलाल नागर एवं रमई काका स्मृति अवध सम्मान-2009'; ‘मालवा भारत हिन्दी साहित्य सम्मान मालवा-2010'; महाराष्ट्र राज्य हिन्दी अकादमी द्वारा ‘सुब्रमण्यम भारती हिंन्दी सेतु विशिष्ट सेवा पुरस्कार 2010-2011'; ‘परिवार पुरस्कार 2010'

    फिल्म-सम्मान : फिल्म 'निकाह' के लिए फिल्म फेयर अवार्ड, उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट अवार्ड, जैसे अवार्ड-सलाम

    बाम्बे अवार्ड-‘गीत’, आशीर्वाद सम्मान-'आखिर क्यो', बलराज साहनी सम्मान 'हिमाचल प्रदेश' , नामी रिपोर्टर

    अवार्ड- ‘वाबुल', दादासाहेब फाल्के अकादमी सम्मान 2011

    टेलीविजन सम्मान : ‘अष्टान पुरस्कार’ धारावाहिक सम्बन्ध के लिए और ‘मदर्स अचीवर्स अवार्ड'- 2006 (ईटीवी चैनल)

    सम्पर्क : 3-डी/603, क्लासिक, पाटलीपुत्र नगर,

    ओशिवरा, जोगेश्वरी (प.) मुम्बई- 400102 महाराष्ट्र :

    ईं-मेल : achala0212@gmail.com

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