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Manrega

Manrega

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  • Pages: 143p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724550
  •  
    आजादी के छह दशक बाद भी ग्रामीण विकास की जटिल चुनौतियां विश्व के विशालतम लोकतंत्र हमारे देश के लिए चिंता का विषय रही हैं । सुखद है कि इस दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 ने कम ही समय में अपनी प्रासंगिकता एवं दीर्घकालिक उपयोगिता प्रमाणित कर दी है । मनरेगा से बन रहे सामाजिक सुरक्षा के परिवेश ने करोड़ों ग्रामीण भारतीयों के जीवन में बड़े बदलाव की संभावना पैदा कर दी है । यह बदलाव मनरेगा केसाथ अन्य महत्त्वपूर्ण योजनाओं एवं कार्यक्रमों के रचनात्मक एवं नवाचारी समावेश द्वारा बड़े स्तर पर लाना संभव हो रहा है । अब मनरेगा के तहत सुयोग्य श्रेणियों के व्यक्तिगत लाभुकों की जमीन में भी भूमि एवं जल संरक्षण एवं सिंचाई कूप जैसी अत्यंत उपयोगी विभिन्न परिसंपत्तियों के निर्माण के प्रावधान ने इन संभावनाओं को और गहन कर दिया है । मनरेगा ने पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण का भी एक महत्त्वपूर्ण जरिया दिया है क्योंकि लागत के हिसाब से 5० प्रतिशत कार्यों का कार्यान्वयन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जा रहा है । मनरेगा के तहत ग्रामसभा को मिली विशिष्ट हैसियत ने हमारे विशाल लोकतंत्र में जन-जन की प्रत्यक्ष भागीदारी का अनूठा प्रयोग संभव बना दिया है । पारदर्शिता और सामाजिक अंकेक्षण हो या फिर शिकायत निवारण और ओम्बड्‌समैन प्रणाली, हर मामले में ठोस एवं नए के माध्यम से मनरेगा एक अद्‌भुत कार्यक्रम बन गया है । मनरेगा के क्रियान्वयन के अब तक के अनुभवों के आधार पर वर्ष 2013 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं । मुझे प्रसन्नता है कि प्रस्तुत पुस्तक में उन दिशानिर्देशों को समाहित किया गया है । ग्रामीण भारत में बड़े बदलाव की वाहक इस योजना का लाभ हर वांछित तक पहुंचाने केलिए इसके प्रावधानों व कार्यप्रणाली के बारे में समुचित जानकारी आवश्यक है । -भूमिका से

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    Vishnu Rajgadhia

    विष्णु राजगढ़िया
    जन्म : 19–10–1965, हजारीबाग
    शिक्षा : पत्रकारिता एवं जनसंचार में यूजीसीµनेटय एम–जे–एम–सी– में स्वर्ण–पदकय रघुवीर सहाय की पत्रकारिता पर पी–एच–डी– हेतु शोधरत ।
    अनुभव : समकालीन जनमत (पटना में) सह–संपादक, विशेष संवाददाताय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल, में व्याख्याताय विकास प्रभात का संपादनय प्रभात खबर इंस्टीट्यूट (रांची) में निदेशक ।
    विशेष : सूचनाधिकार आंदोलन तथा विकास पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव ।
    प्रकाशन : समाचार : संकलन एवं संपादन
    सूचनाधिकार : व्यावहारिक मार्गदर्शिका
    सूचनाधिकार : नया लोकतंत्र, नई पत्रकारिता
    राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम
    बिहार : यहां कब्र है लोकतंत्र की
    महेंद्र सिंह : जनता का आदमी ।
    संप्रति : प्रभात खबर (धनबाद) में स्थानीय संपादक ।

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