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  • Pages: 123p
  • Year: 2008
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126703197
  •  
    'मीना बाज़ार' उर्दू के सुप्रसिद्ध अफसानानिगार सआदत हसन मंटो की बहुचर्चित संस्मरण-कृति है, जिसमे उन्होंने फिल्म-जगत की कुछ मशहूर हस्तियों का पारदर्शी चित्रण किया है ! ऐसा करते हुए उनका लहजा आत्मीय होकर भी बेलौस है ! इसमें उनका अपना स्वाभाव और नजरिया तो है ही, वे सामाजिक सच्चाइयां भी हैं, जब फिल्म-कलाकारों को आज के जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं थी ! मंटो ने यहाँ नर्गिस, नसीम, अशोक कुमार, कुलदीप कौर, श्याम, सितारा, बी.एच. देसाई और इस्मत चुगताई जैसी हस्तियों की विशेष रूप से चर्चा की है ! इन हस्तियों को वे एक दोस्त की हैसियत से तो देखते ही हैं, कलाकार के नाते भी देखते हैं और उनके निजी तथा व्यावसायिक जीवन को एक खास अदाकारी के साथ हमारे सामने खोलते हैं ! मंटो हिंदी और उर्दू, दोनों ही भाषाओँ की अदबी दुनिया के चहेते रचनाकार हैं ! उनके जैसी तरल मानवीय संवेदना और जीवनानुभवों की विविधता बहुत कम लेखकों में दिखाई पड़ती है ! निस्संदेह, 'मीनाबाजार' उनकी उसी संवेदना और रचनात्मक विविधता का एक महत्तपूर्ण हिस्सा है !

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    Saadat Hasan Manto

    सआदत हसन मंटो

    सआदत हसन मंटो का जन्म 11 मई, 1912 को समराला, पंजाब में हुआ था। 1931 में मैट्रिक करने के बाद आगे की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की। मंटो फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। मंटो की कहानियों की पिछली सदी से अब तक जितनी चर्चा हुई है, उतनी उर्दू और हिन्दी क्या, दुनिया की किसी भी भाषा के कथाकार की शायद ही हुई हो। यही कारण कि चेख़व के बाद मंटो ही थे, जिन्होंने अपनी कहानियों के दम पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफलता हासिल की।

    उनकी प्रसिद्ध कहानियों में 'ठंडा गोश्त', 'टोबा टेक सिंह', 'काली शलवार', 'मोज़ेल', 'दस रुपये' आदि शामिल हैं। उनके कुछ कहानी-संग्रहों के अलावा एक उपन्यास, रेडियो नाटकों के पाँच संग्रह, निबन्धों के तीन संग्रह, और व्यक्तिगत स्केच के दो संग्रह प्रकाशित हैं।

    कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और तीन बार पाकिस्तान बनने के बाद, लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। मंटो की कई कहानियों का अनुवाद दुनिया की विभिन्न भाषाओं में किया जा चुका है। मंटो की सम्पूर्ण रचनाओं का संग्रह राजकमल प्रकाशन से 'सआदत हंसन मंटो : दस्तावेज़' नाम से पाँच खंडों में प्रकाशित है।

    निधन : 18 जनवरी, 1955

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