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Meri Zameen Mera Safar

Meri Zameen Mera Safar

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  • Pages: 152
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Radhakrishna Prakashan
  • ISBN 13: 9788183619059
  •  
    विनोद कुमार त्रिपाठी पेशेवर अदीब नहीं हैं, अदब और शायरी उनके भीतर की वह बेचैनी है जो उनके व्यस्त और व्यावसायिक तौर पर सफल जीवन में रोज बूँद-बूँद इकटूठा होती रहती है और फिर जैसे ही वे अपने नज़दीक बैठते हैं तो गजलों और नज्मों को शक्ल में फूट पड़ती है । यही वे लम्हे होते हैं जब वे कहते हैं, ‘ जलाकर आग दिल में, खुद को इक तूफान मैं कर दूँ । ‘लेकिन तूफान होने की यह कामना उनके व्यक्ति तक सीमित नहीं है, इसमें वह पूरा समाज और परिवेश शामिल है जो उनके साथ हमारे भी इर्द-गिर्द हमेशा रहता है और जिसकी अजीबोगरीब फितरत से हम सब वाकिफ़ हैं । हम भी उसके बीच वही तकलीफ़ महसूस करते हैं जो उन्हें होती है लेकिन बहैसियत एक हस्सास शायर वे उसे कह भी लेते हैं और बहुत खूबसूरती से कहते हैं । इस किताब में शामिल उनकी ग़ज़लें और नज्में गवाह हैं कि मौजूदा दौर की जेहनी और जिस्मानी दिक्कतों को उन्होंने बहुत नज़दीक और ईमानदारी से महसूस किया है । एक मिसरा है, "मैंने कल अपने उसूलों को नसीहत बेची’ । रूह तक फैली हुई ये दुकानदारी आज हम सब का सच हो चुकी है । ऐसा कुछ अपने पास हमने नहीं रखा जिसे हम बेचने को तैयार न हों, और जिसके ख़रीदार आसपास मौजूद न हों । लेकिन हम इसे वक्त की जरुरत कहकर किनारा कर लेते हैं । विनोद त्रिपाठी इस विडंबना को लेकर सचेत हैं । वे देख रहे हैं कि जिन्दगी की ये तथाकथित मजबूरियाँ हमें कहॉ लेकर जा रही हैं और ये भी कि अगर हम इन्हें रोक नहीं सकते तो इन पर निगाह तो रखना ही होगा । ‘दिखाकर ख्वाब मुझको मारने को जिद है जो तेरी'-एक गजल का ये मिसरा बताता है कि शायर ने अपने सामने मौजूद वक्त और वक्ती ताकतों को साजिशों को पहचान लिया है । और यहॉ से एक उम्मीद निकलती है कि हो सकता है कल उनका जवाब भी हम जुटा लें और अपने इंसानी सफ़र की बाकी उड़ानों को इंसानों की तरह अंजाम दे सकें ।

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    Vinod Kumar Tripathi 'Bashar'

    विनोद कुमार त्रिपाठी 'बशर'

    पेशे से विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम करनेवाले विनोद कुमार त्रिपाठी का जन्म 1957 में इलाहाबाद में हुआ । वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर किया । इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, इलाहाबाद में राजनीतिशास्त्र के अध्यापक रहे ।

    पिछले तकरीबन तीस साल से विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी पदों पर उल्लेखनीय प्रशासनिक और प्रबन्धन कौशल के साथ कार्य करते रहे हैं । 1982 में भारतीय राजस्व रोया में उच्च पद पर कार्य आरंभ किया और 2001 में आयकर विभाग में कमिश्नर बने ।

    कानून, आयकर, कॉरपोरेट लॉ, वित्तीय मामलों के गहरे जानकार ।

    सम्प्रति, 2005 से रिलायंस ' अनिल अंबानी’ गुप के अध्यक्ष हैं और अन्य कुछ कम्पनियों में निदेशकीय भूमिका निभा रहे हैं ।

    लेखन में रुचि विद्यार्थी जीवन से ही है । शायर के रूप में उन्हें अदबी हलकों में विशेष स्थान प्राप्त है । ‘मेरी जमीन मेरा सफ़र’ के अलावा उनकी एक और किताब ‘मेरी जमीन के लोग’ है । उनको ग़ज़लों को शंकर महादेवन, अलका याज्ञनिक, सुरेश वाडकर और मोहम्मद अजीज जैसे गायकों का स्वर मिला है ।

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