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Monalisa Ki Aankhen

Monalisa Ki Aankhen

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  • Pages: 104p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724840
  •  
    सुमन केशरी की कविताएँ एक आधुनिक स्त्री की कविताएँ हैं: वे जितनी एक आधुनिक चौकस व्यक्ति हैं उतनी ही एक संवेदनशील और सजग स्त्री भी। उनमें एक गहरा अवसाद और प्रतिरोध है लेकिन चीख-पुकार नहीं। वे घटनाओं और आसपास जो हो रहा है उससे प्रतिकृत तो होती हैं लेकिन उसे नाटकीय वक्तव्य बनाने से बचती हैं। उनके पास आधुनिकता का अतिरेक नहीं, संवेदना का सहज संयम है। उनकी कविता में मोनालिसा, माँ, बेटी, पूर्वज, सपने, चिड़िया, मणिकर्णिका, सम्बन्ध, औरत सब जीवन की असंख्य छवियों में से कुछ की तरह विन्यस्त होते हैं। सुमन केशरी की कविता यह अहसास बनाए रखती है कि जीवन विस्तृत और अबाध है और कविता उस पर, उस विशाल और जटिल वितान पर ससंकोच खुली खिड़की भर है। उनकी कविता में कई मर्मचित्र हैं जो मन में बिंध से जाते हैं: ‘लहू का आलता लगाए’, ‘सुनो बिटिया/मैं उड़ती हूँ/खिड़की के पार चिड़िया बन/तुम आना’, ‘अपने ही तारे को/अस्त होते देखना/मरने जैसा है/धीरे...धीरे’, ‘पीठ दिए एक चिता को/धोती सुखाता दूसरी की आँच में/प्रेत-सा खड़ा’, ‘बिटिया बोली/चिड़िया का बच्चा बोला’, ‘चुटकी भर विश्वास/नमक-सा’ आदि। सुमन केशरी का यह नया संग्रह काव्य-कौशल की परिपक्वता और अनुभव के विस्तार के लिए उल्लेखनीय है। - अशोक वाजपेयी

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    Suman Keshari

    जन्म : 15 जुलाई, मुजफ्फरपुर, बिहार ।

    सुमन केशरी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नईं दिल्ली से सूरदास पर शोघ किया है तथा यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया, पर्थ से एम बी. ए. ।

    सुमन केशरी लम्बे समय तक भारत सरकार में प्रशासन सम्बन्धी कार्य करती रही हैं | लेखन एवं अध्यापन में गहरी रुचि के कारण सन 2013 में ही उन्होंने भारत सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर आई.टी.एम. ग्वालियर में मैनेजमेंट का अध्यापन किया । प्रशासन से शोघ एवं अध्यापन तक के गहन व व्यापक अनुभवों के फलस्वरूप सुमन की कविताओं का फलक अत्यन्त विस्तृत है । इन कविताओं की भावसघन और विचारोत्तेजक सृजनात्मकता न केवल रूपविधान में, बल्कि मिथकों के आधुनिक अर्थान्वेषण में भी व्यक्त होसी है | उनकी कविताएँ शब्द की शाश्वतता और निरन्तरता में कवि की आस्था को रेखांकित करती कविताएँ हैं ।

    उनके दो काव्य संग्रह प्रकाशित है –याज्ञवल्क्य से बहस (2008) और मोनालिसा की आँखे ( 2013) । तीसरा संकलन शब्द और सपने (2015) ई-बुक के रूप में प्रकाशित हैं । मोनालिसा की आँखे संग्रह का अनुवाद मराठी एवं राजस्थानी भाषाओं में हुआ है और उनकी अनेक कविताओं का अनुवाद अग्रेजी फ्रेंच, नेपाली एवं मराठी भाषाओं मेँ हुआ है ।

    इस नए संकलन का कविताओं में, हम कवि को लोकतांत्रिक मिजाज और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सामने आए संकटों से टकराते हुए तो देखते ही है, साथ ही प्रकृति की उस उपस्थिति से संवाद करते भी देखते है, जो दिनो दिन छीजती चली जा रही है ।

    इन दिनों वे स्वतंत्र लेखन कर रही हैं ।

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