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Mud Mudke Dekhta Hoon

Mud Mudke Dekhta Hoon

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  • Pages: 203p
  • Year: 2012, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126702966
  • ISBN 13: 9788126702961
  •  
    यह मेरी आत्मकथा नहीं है ! इन 'अंतर्दर्शनों' को मैं ज्यादा-से-ज्यादा 'आम्त्काथ्यांश' का नाम दे सकता हूँ ! आत्मकथा वे लिखते हैं जो स्मृति के सहारे गुजरे हुए को तरकीब दे सकते हैं ! लम्बे समय तक अतीत में बने रहना उन्हें अच्छा लगता है ! लिखने का वर्तमान क्षण, वहां तक आ पहुँचने की यात्रा ही नहीं होता, कहीं-न-कहीं उस यात्रा के लिए 'जस्टिफिकेशन' या वैधता की तलाश भी होती है-मानो कोई वकील केस तैयार कर रहा हो ! लाख न चाहने पर भी वहां तथ्यों को काट-छाँटकर अनुकूल बनाने की कोशिशें छिपाए नहीं छिपती : देख लीजिए, मैं आज जहाँ हूँ वहां किन-किन घाटियों से होकर आया हूँ ! अतीत मेरे लिए कभी भी पलायन, प्रस्थान की शरणस्थली नहीं रहा ! वे दिन कितने सुन्दर थे....काश, वही अतीत हमारा भविष्य भी होता-की आकांक्षा व्यक्ति को स्मृति-जीवी, निठल्ला और राष्ट्र को सांस्कृतिक राष्ट्रवादी बनाती है ! जाहिर है इन स्मृति-खण्डों में मैंने अतीत के उन्ही अंशों को चुना है जो मुझे गतिशील बनाए रहे हैं ! जो छूट गया है जो मुझे गतिशील बनाए रहे हैं ! जो छूट गया हेई वह शायद याद रखने लायक नहीं था; न मेरे, न औरों के.... कभी-कभी कुछ पीढ़ियाँ अगलों के लिए खाद बनती हैं ! बीसवीं सदी के 'उत्पादन' हम सब 'खूबसूरत पैकिंग' में शायद वही खाद हैं ! यह हताशा नहीं, अपने 'सही उपयोग' का विश्वास है, भविष्य की फसल के लिए....बुद्ध के अनुसार ये वे नावें हैं जिनके सहारे मैंने जिन्दगी की कुछ नदियाँ पार की हैं और सिर पर लादे फिरने की बजाय उन्हें वहीँ छोड़ दिया है !

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    Rajendra Yadav

    जन्म : 28 अगस्त, 1929

    1951 में आगरा विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में एम.ए. (हिन्दी) करने क उपरान्त लेखन को ही अपनी जीविका का माध्यम बनाया । पहली कहानी ‘प्रतिहिंसा' 1947 में ‘कर्मयोगी’ में प्रकाशित हुई । एक कविता-

    संग्रह ’आवाज़ तेरी है’ (1960) के अतिरिक्त अब तक कहानियाँ,  उपन्यास, संस्मरण, रेखाचित्र, आलोचना, सम्पादकीयों और अनुवादों की कई किताबे प्रकाशित हो चुकी हैं । 1964 में अक्षर प्रकाशन प्रा. लि. की स्थापना की , जिसमें अनेक रचनाकारों-अज्ञेय, कमलेश्वर, मोहन राकेश, राही मासूम रजा आदि-की महत्त्वपूर्ण किताबों का प्रकाशन । 1 9 8 6 में अक्षर प्रकाशन से किताबों का प्रकाशन बन्द कर दिया और प्रेमचन्द द्वारा स्थापित ‘हंस’ पत्रिका का पुनः प्रकाशन शुरू किया | राजेंद्र यादव बिहार सरकार द्वारा ‘शिवपूजन सहाय सम्मान', हिन्दी  अकादमी, दिल्ली के ‘शलाका सम्मान, 'शब्द साधक सम्मान' और उत्तर प्रदेश सरकार के ‘यश भारती’ पुरस्कार रने भी सम्मानित हो चुक हैं ।

    निधन : 28 अक्टूबर, 2013

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